डमी शिकायत पर कार्रवाई नहीं पड़ी भारी: पुणे पुलिस के कॉन्स्टेबल की दो वर्षों की वेतनवृद्धि रोकी गई
हवेली : पुणे पुलिस ने पुलिस थानों में आम नागरिकों के साथ होने वाले व्यवहार का आकलन करने के लिए किए गए एक आंतरिक परीक्षण (डमी शिकायतकर्ता अभियान) में लापरवाही सामने आने पर एक पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। शिकायत दर्ज करने में विफल रहने पर कॉन्स्टेबल राजेश सालुंखे की दो वर्षों की वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोक दी गई है।
जानकारी के अनुसार, 21 जून 2026 को पुलिस ने यह जांचने के लिए विशेष अभ्यास किया था कि शिकायत लेकर आने वाले नागरिकों को पुलिस थानों में उचित सहायता मिल रही है या नहीं। इस दौरान शुभम नामक युवक को फूड डिलीवरी एजेंट बनाकर मुंढवा पुलिस थाना क्षेत्र में भेजा गया। उसने सड़क पर हुए विवाद (रोड रेज) में एक वाहन चालक द्वारा रोकने, गाली-गलौज करने और धमकी देने की शिकायत करने का नाटक किया।
शुभम पहले मुंढवा पुलिस चौकी पहुंचा, जहां से उसे मुख्य पुलिस थाने भेज दिया गया। वहां उसकी मुलाकात कॉन्स्टेबल राजेश सालुंखे से हुई। आरोप है कि सालुंखे ने शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की। उन्होंने घटना स्थल पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने की बात कही, शिकायतकर्ता से चोट लगने के बारे में पूछा और उसे "डिलीवरी का काम करते समय सावधानी से वाहन चलाने" की सलाह देकर बिना शिकायत दर्ज किए वापस भेज दिया।
इस पूरे अभ्यास की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कर रहे थे। जांच में कॉन्स्टेबल राजेश सालुंखे को कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया गया। इसके बाद पुलिस उपायुक्त (जोन-6) जीवन बेनिवाल ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी दो वर्षों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई पुलिस थानों में नागरिकों की शिकायतों के प्रति जवाबदेही और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
रिपोर्टर : यश सोलंकी
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