झांसी नगर निगम की सदन बैठक हंगामे की भेंट चढ़ी, पार्षदों ने किया बहिष्कार
झांसी : आज नगर निगम की सदन बैठक सोमवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। 60 वार्डों में ज्यादातर पार्षदों ने सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार कर दिया। नगर निगम मुख्य द्वार पर जमकर नारेबाजी की। पार्षदों ने अधिकारियों पर लापरवाही और अनदेखी का आरोप लगाया। दरअसल, सदन की बैठक सुबह 11:45 बजे निर्धारित थी। सभी पार्षद समय से सभागार में पहुंच गए, लेकिन उनका आरोप है कि तय समय के काफी देर बाद भी अधिकारी मौजूद नहीं थे। करीब 20 मिनट बाद अपर नगर आयुक्त समेत कुछ अधिकारी पहुंचे, लेकिन मेयर बिहारी लाल आर्य के अनुपस्थित होने की जानकारी मिलने पर वे भी सभागार छोड़कर चले गए। इसके बाद पार्षदों का कहना है कि लंबे समय तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। इस दौरान पार्षदों का आक्रोश उस वक्त और बढ़ गया जब नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने कथित तौर पर कटाक्ष करते हुए कहा कि "बैठक छोड़कर जा रहे हैं तो खाना खाकर जाएं।" इस टिप्पणी को लेकर पार्षद भड़क गए और इसे अपमानजनक बताया। पार्षद नीता विकास यादव ने आरोप लगाया कि निगम में केवल उन्हीं लोगों की सुनी जा रही है जो अधिकारियों की “चापलूसी" करते हैं, जबकि जनहित के मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्षद जनता के विकास के लिए आए थे, लेकिन अधिकारियों के रवैये से निराश हैं।
नगर निगम के मुख्य द्वार पर जब पार्षद प्रदर्शन कर रहे थे, उसी दौरान नगर आयुक्त आकांक्षा राणा अपनी गाड़ी से वहां से निकल गईं। पार्षदों ने उन्हें रोककर बात करने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी नहीं रुकी और वह सीधे बाहर चली गईं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय पर सवाल खड़े हो गए हैं।
भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, निर्दलीय और समाजवादी पार्टी के पार्षदों ने एक स्वर में नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षद बंटी सोनी ने कहा कि अधिकारी केवल सरकारी पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि झांसी में एक भी ढंग का काम अधिकारियों ने नहीं कराया। अब उनकी पोल न खुल जाए तो ऐसे में वह सदन नहीं चलने देने के लिए ये हालात बना रहे हैं।
अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए नगर निगम की महिला पार्षदों ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए नगर निगम अधिकारियों को आड़े हाथ लिया। पार्षद नीता विकास यादव, पूर्व उपसभापति और वर्तमान पार्षद प्रियंका साहू समेत महिला पार्षदों ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि वह झांसी की रानी हैं। अधिकारी याद रखें कि हम लोग उस धरती से आते हैं, जहां की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को ये शहर नहीं लूटने दिया। बोलीं हम लोग अधिकारियों को अपना झांसी नहीं लूटने देंगे।
पार्षद लंबे समय से नगर निगम अधिकारियों पर मनमानी करने के साथ ही जनता के पैसे का बंदरबांट करने का आरोप लगाते रहे हैं। बीते दिनों भी नगर निगम की बिल्डिंग के सामने धरने पर बैठे पार्षदों ने अपर आयुक्त से लेकर नगर आयुक्त का रास्ता रोक दिया था।
लेकिन उस मामले में कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। आज फिर से पार्षदों ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जो प्रस्ताव वह लोग बैठक में शामिल करने के लिए देते हैं उन्हें कार्यवृत में शामिल नहीं किया जाता।
हम लोगों के वार्ड में अगर एक लाख रुपए का काम भी हो तो अधिकारी नहीं होने देते जबकि, जिन वार्डों में पार्षद तक नहीं हैं वहां अधिकारियों ने पांच-पांच करोड़ के काम करा दिए हैं।
अपर नगर आयुक्त राहुल यादव ने पूरे मामले को लेकर कहा कि सदन की बैठक के लिए सभी अधिकारी समय से पहले सदन पहुंच गए थे। सुबह 9 बजे से ही अधिकारी बैठक कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कोई अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचा हो।
इस मामले को लेकर नगर निगम के महापौर बिहारी लाल आर्य ने बताया कि अक्षय तृतीया होने के कारण पार्षद सामाजिक, धार्मिक तथा पारिवारिक कार्यों में व्यस्त थे, इसलिए ज्यादातर पार्षदों के व्यस्त होने के कारण बैठक को आगे बढ़ा दिया गया है। हंगामे तथा नारेबाजी की बात को लेकर उन्होंने कहा कि सब कुछ हंसी मजाक में चल रहा था।

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