अनौखा दीपक है भगवान की दिव्य ज्योति: विशाश्री माताजी
झांसी : अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के बाइसवें दिन सोमवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने भगवान की दिव्य ज्योति को अनौखे दीपक की संज्ञा देते हुए कहा कि सभी दीपक आपके सामने जुगनू के समान हैं।ईंधन एवं बिना घी बाती रहित आपका दीपक जो कितने ही आंधी तूफान आ जाये उसमें अडिग रहते हुए तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहा है।आपकी परम ज्योति केवल्य ज्ञान की ज्योति जिसकी उपमा किसी से भी नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस धरा धाम के जीवों की दृष्टि ज्योति विहीन कुदरत की ओर निहारती है। जबकि जीव ही एक ऐसी पुनीत पावन आत्मा है जो केवल्य ज्ञान की ज्योति को ज्वाजल्यमान कर सकता है इसलिए संसारिक चमक-दमक को छोड़ प्रभु की अनौखी ज्योति को निहारने की आदत बना लो तुम्हारे भीतर भी स्वत: ज्ञान की ज्योति जागृत हो जायेगी। इससे पूर्व सोमवार के पुण्यार्जक पद्म प्रभु भगवान महिला मंडल बड़ा मंदिर, पुष्पा राजेंद्र बड़जात्या, सारिका अमीष जैन,श्रव्या, सर्वोच्च जैन एवं समस्त बड़जात्या परिवार सदर बाजार झांसी रहे,जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया।
माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत के महामंत्री कमल जैन लोकपथ एवं करगुवां मंत्री शिरोमणि जैन ने किया।अंत में अशोक जैन जैनिथ ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, श्रीमती रानी भागचंद जैन निर्माण मंत्री,प्रीति शिरोमणि जैन, रज्जू जैन अछरौनी, सीए ऋषभ भंडारी, मनोज नायक, रविंद्र जैन नारियल, , रौनक जैन,इंजी. बालचंद जैन,नरेंद्र जैन नारायण बाग आदि मौजूद रहे।
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