पैट्रोल डालकर आग लगाने से मौत के मामले में दोषी पति को आजीवन कारावास, एक लाख रुपए अर्थदण्ड
झांसी। पांच साल पहले पति-पत्नी द्वारा पैट्रोल डालकर आग लगाने से मौत के मामले में दोषी पति को विशेष न्यायाधीश,अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम नेत्रपाल सिंह के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए एक लाख रुपए अर्थदण्ड से भी दंडित किया। जमानत पर रिहा होने के बाद से हत्यारोपी महिला फरार है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ज्ञान स्वरूप (पिंटू) राजपूत के अनुसार वादी मुकदमा विकास अहिरवार ने थाना कोतवाली पर दी गई तहरीर में बताया था कि"मेरे भाई अरविन्द को कल 20 सितंबर 2021 को चतुरयाना निवासी शेखर अहिरवार और शेखर की पत्नी अर्चना ने झांसी मिलने के लिए बुलाया था । अरविन्द झांसी में शेखर और अर्चना से मिलने आया था। आज 21 सितंबर 2021 को सुबह मेरे भाई का फोन आया कि मैं एडमिट हूँ ।फोन पर जानकारी मिलने पर झांसी आया तो देखा कि भाई अरविन्द मेडिकल कॉलेज में भर्ती है, जिसकी हालत बहुत गम्भीर है। वादी की तहरीर के आधार पर अभियुक्तगण शेखर व अर्चना के विरुद्ध धारा 307,326 भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार मुकदमा पंजीकृत किया गया। मुक्ताकाशी मंच के निकट पैट्रोल डालकर आग लगाए जाने से गंभीर रूप से झुलसे अरविंद की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाने पर 20 नवंबर 2021 को मुकदमा धारा 302 भा.दं. सं. में तरमीम किया गया। विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों एवं मृत्यु पूर्व ब्यान के आधार पर अभियुक्तगण शेखर पुत्र श्रीराम अहिरवार व अर्चना पत्नी शेखर के विरुद्ध धारा-302/34 भा०द०सं० में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया, जिस पर न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया।
जमानत के बाद अभियुक्ता अर्चना के लगातार फरार रहने के कारण न्यायालय के आदेश पर 20 अगस्त 2024 को उसकी पत्रावली पृथक कर दी गयी। न्यायालय द्वारा केवल अभियुक्त शेखर के विरूद्ध ही विचारण किया गया। जहां दोषसिद्ध अपराधी शेखर को धारा 302/34 भा.दं.सं. में आजीवन कारावास एवं एक लाख रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। अर्थदण्ड अदा न करने पर शेखर को एक वर्ष के अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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