कुशीनगर का बाबा राघव दास छात्रावास बदहाली का शिकार 1956 में बना भवन जिम्मेदारों की उदासीनता से ध्वस्त होने के कगार पर

कुशीनगर​ : विश्व पर्यटन स्थली कुशीनगर में वर्ष 1956 में निर्मित बाबा राघव दास छात्रावास आज उपेक्षा और बदहाली का शिकार होकर ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गया है। लगभग 65 वर्ष पूर्व मजबूत दीवारों और सीमेंटेड पतरे से निर्मित इस भवन में रहकर हजारों छात्रों ने शिक्षा ग्रहण की और अपने भविष्य को संवारने की नींव रखी।
बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रमाशंकर त्रिपाठी ने पूर्वांचल के गांधी कहे जाने वाले बाबा राघव दास के नाम पर इसका नामकरण ‘बाबा राघव दास छात्रावास’ किया था, जो आगे चलकर ‘हॉस्टल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कभी इसका परिसर विद्यार्थियों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, जहां स्कूल से लौटने के बाद छात्र प्रतिदिन खेलकूद किया करते थे। आज वही भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है और कुशीनगर की पहचान रहा यह छात्रावास जर्जर हालत में पहुंच चुका है।
जिम्मेदारों की उदासीनता का आलम यह है कि छत से पानी टपकता है, दरवाजे-खिड़कियां, किचन की चिमनी और दीवारें टूट चुकी हैं। परिसर झाड़-झंखाड़ से पटा हुआ है। स्थानीय लोगों द्वारा अतिक्रमण भी जारी है। कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर ताले जड़ दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ लोग दूर-दराज से आए छात्रों को यहां रखकर किराया भी वसूल रहे हैं।
इस संबंध में बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर के प्राचार्य विनोद मोहन मिश्र ने बताया कि छात्रावास किसी को भी आधिकारिक रूप से आवंटित नहीं किया गया है और न ही किसी से एक रुपये का किराया लिया जाता है। कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया है, जिसकी जानकारी प्रशासन को दी जा चुकी है।

रिपोर्टर : सत्यनारायण

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