प्रशासनिक अंधेरगर्दी: कागजों में सड़क,जमीन पर कब्जा;आडागेला के किसानों का छिना रास्ता
ढीपरी चंम्बल : सरकारी तंत्र की सुस्ती और भू-माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण ग्राम पंचायत ढीपरी चंबल के आडागेला हरी नगर गांव में देखने को मिल रहा है। यहाँ ढीपरी चंबल से खातौली जाने वाले सरकारी रास्ते पर दबंगों ने अवैध कब्जा कर उसे खेतों में तब्दील कर दिया है। विडंबना देखिए कि जिस रास्ते को नरेगा के तहत सार्वजनिक धन खर्च कर बनाया गया था, आज किसान वहां से गुजरने के लिए भी मोहताज हैं।
खेतों तक नहीं पहुँच पा रहे ट्रैक्टर, फसलें हो रही बर्बाद
रास्ता अवरुद्ध होने के कारण किसानों को अपनी ही जमीन पर जाने के लिए खातौली होकर मीलों का लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आधा रास्ता पूरी तरह जोत लिया गया है और बचे हुए हिस्से पर अतिक्रमण कर लिया गया है।
विवाद की स्थिति: जब भी कोई किसान खेत जाने की कोशिश करता है, तो कब्जाधारी उनसे गाली-गलौज और झगड़ा करते हैं।
आर्थिक नुकसान: सही समय पर ट्रैक्टर और मशीनरी खेतों तक न पहुँच पाने के कारण फसल की बुवाई और कटाई पिछड़ रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक चपत लग रही है।
पंचायत से एसडीएम तक गुहार, पर ढाक के वही तीन पात
ग्रामीणों ने इंसाफ के लिए कोई दरवाजा बाकी नहीं छोड़ा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत ढीपरी चंबल, पंचायत समिति और एसडीएम (SDM) को कई बार लिखित में शिकायतें दी जा चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि सारे सबूत और शिकायतें होने के बावजूद अधिकारियों ने अब तक मौके पर जाकर अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं उठाई है।
ग्रामीणों का तीखा सवाल:
"क्या सरकारी सड़क किसी की निजी संपत्ति हो सकती है? अगर प्रशासन ने नरेगा की सड़क को सुरक्षित नहीं रखा, तो फिर विकास के दावों का क्या मतलब? हम अपनी फसलें बचाएं या इन कब्जाधारियों से लड़ें?"
बड़े टकराव की आशंका
रास्ते को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी किसी दिन बड़ी हिंसक झड़प का कारण बन सकती है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पैमाइश करवाकर रास्ता बहाल नहीं किया गया, तो वे तहसील मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
इनका कहना है:
"हमें खेतों में जाने में बहुत परेशानी होती है। प्रशासन को लिखित में देने के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है। हम चाहते हैं कि नरेगा वाला रास्ता तुरंत खुलवाया जाए ताकि हम समय पर अपनी खेती कर सकें।"
— पीड़ित ग्रामीण, आडागेला हरी नगर
संवाददाता : आकाश बैरवा


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