गुरु का महत्व : जीवन को प्रकाशमान करने वाली दिव्य शक्ति : सिंधु मिश्रा
लातेहार : सिंधु मिश्रा ने कहा कि गुरु केवल वह नहीं जो विद्यालय में पढ़ाए, बल्कि वह प्रत्येक व्यक्ति है जो हमारे जीवन को सही दिशा दिखाए।मनुष्य का जीवन जन्म से लेकर अंतिम सांस तक सीखने की एक सतत यात्रा है। इस यात्रा में अनेक लोग हमारे जीवन में आते हैं, कुछ हमें ज्ञान देते हैं, कुछ अनुभव देते हैं और कुछ अपने व्यवहार से जीवन जीने की कला सिखाते हैं। ऐसे प्रत्येक व्यक्ति हमारे लिए गुरु के समान हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान दिया गया है। कबीरदास जी का प्रसिद्ध दोहा आज भी हमें गुरु की महिमा का स्मरण कराता है—
"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।"
गुरु वह दीपक हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। जिस प्रकार अंधेरी रात में दीपक राह दिखाता है, उसी प्रकार गुरु जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग का चयन करना सिखाते हैं। वे केवल पुस्तक का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि संस्कार, अनुशासन, धैर्य, परिश्रम, विनम्रता और मानवता का भी पाठ पढ़ाते हैं।
आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। ज्ञान के अनेक साधन उपलब्ध हैं, लेकिन सही और गलत में अंतर करना, विवेकपूर्ण निर्णय लेना तथा मानवीय मूल्यों को अपनाना केवल एक सच्चे गुरु ही सिखा सकते हैं। इसलिए जीवन में गुरु का स्थान कभी कम नहीं हो सकता।
हर बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर होता है और उसके पहले गुरु उसके माता-पिता होते हैं। जन्म लेते ही बच्चा बोलना, चलना, मुस्कुराना, प्रेम करना, सम्मान करना और संस्कार सीखना अपने माता-पिता से ही आरंभ करता है। माता हमें ममता, त्याग और करुणा का पाठ पढ़ाती है, जबकि पिता हमें संघर्ष, आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और जीवन की चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं।
यदि घर में अच्छे संस्कार मिलते हैं तो विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करना और समाज में आदर्श नागरिक बनना सहज हो जाता है। इसलिए माता-पिता का सम्मान करना और उनके अनुभवों को जीवन में अपनाना प्रत्येक संतान का पहला कर्तव्य है।
इसके बाद विद्यालय के शिक्षक हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। एक श्रेष्ठ शिक्षक अपने विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानता है, उन्हें प्रोत्साहित करता है और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस देता है।
कई बार शिक्षक की एक छोटी-सी प्रेरणा किसी विद्यार्थी का पूरा जीवन बदल देती है। यही कारण है कि डॉक्टर, वैज्ञानिक, सैनिक, न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, कलाकार या समाजसेवी—हर सफल व्यक्ति अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों को अवश्य देता है।
जीवन में मिलने वाले हर गुरु को नमन
गुरु केवल विद्यालय तक सीमित नहीं होते। जीवन के हर मोड़ पर हमें कोई न कोई ऐसा व्यक्ति मिलता है जिससे हम कुछ न कुछ सीखते हैं।
कभी कोई किसान हमें कठिन परिश्रम का महत्व सिखाता है।
कोई सैनिक देशभक्ति और त्याग का संदेश देता है।
कोई सफाईकर्मी हमें स्वच्छता और जिम्मेदारी का महत्व समझाता है।
कोई चिकित्सक सेवा और संवेदनशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
कोई समाजसेवी मानवता और परोपकार का मार्ग दिखाता है।
कई बार हमारी असफलताएँ भी हमारी सबसे बड़ी गुरु बन जाती हैं। वे हमें सिखाती हैं कि गिरकर भी उठना चाहिए और निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
प्रकृति भी हमारी महान गुरु है। वृक्ष हमें निस्वार्थ सेवा का संदेश देते हैं, नदियाँ निरंतर बहते रहने की प्रेरणा देती हैं, सूर्य समय का महत्व सिखाता है और पृथ्वी धैर्य एवं सहनशीलता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इसलिए जीवन में जहाँ कहीं से भी कोई अच्छी सीख मिले, उसे विनम्रतापूर्वक स्वीकार करना चाहिए। यही सच्चे विद्यार्थी की पहचान है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने गुरुजनों के प्रति केवल औपचारिक सम्मान ही न दें, बल्कि उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को अपने जीवन में उतारें। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
हमें संकल्प लेना चाहिए कि—
हम अपने माता-पिता का सदैव सम्मान करेंगे।
अपने शिक्षकों का आदर करेंगे और उनके मार्गदर्शन का पालन करेंगे।
जीवन में मिलने वाली हर अच्छी सीख को अपनाएँगे।
ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कारों को भी महत्व देंगे।
समाज में प्रेम, सद्भाव, ईमानदारी और मानवता का संदेश फैलाएँगे।
याद रखिए, गुरु केवल हमारे भविष्य का निर्माण नहीं करते, वे पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं। यदि गुरु श्रेष्ठ होंगे और शिष्य उनके आदर्शों का पालन करेंगे, तो एक सशक्त, संस्कारित और विकसित भारत का निर्माण निश्चित होगा।
आइए, आज हम उन सभी गुरुजनों को हृदय से नमन करें—अपने माता-पिता, शिक्षकों, मार्गदर्शकों, वरिष्ठजनों, समाज के प्रेरणादायी व्यक्तित्वों और उन सभी लोगों को, जिनसे हमने जीवन में कुछ अच्छा सीखा है।
अंत में यही कहना उचित होगा—
"गुरु ज्ञान का दीप हैं, गुरु जीवन का आधार।
गुरु से ही उज्ज्वल बने, मानव का संसार।।"
सभी गुरुजनों को सादर प्रणाम।
रिपोर्टर : बब्लू खान
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