पिरदाग में पत्थर खनन को लेकर उठे गंभीर सवाल, दो साल से चल रहे खनन की अधिकारियों को जानकारी नहीं!
लातेहार : पिरदाग गांव में पत्थर खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि खनन के लिए निर्धारित भूमि और वास्तविक उत्खनन स्थल में अंतर है। वर्ष 2024 में उमेश कुमार सिंह को प्लॉट नंबर 29पी, 31पी, 32पी और 34पी में कुल एक एकड़ सात डिसमिल भूमि पर पत्थर खनन का आवंटन मिला था। लेकिन स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, निर्धारित स्थल पर खनन नहीं किया जा रहा है। इसके बजाय दूसरे स्थान पर बड़े पैमाने पर पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि खनन कार्य करीब दो एकड़ 66 डिसमिल के क्षेत्र में संचालित किया जा रहा है, जबकि वास्तविक उत्खनन का दायरा लगभग पांच एकड़ तक बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खनन का आवंटन एक निश्चित क्षेत्र के लिए किया गया है, तो दूसरे स्थान पर और कथित तौर पर अधिक क्षेत्र में पत्थर का उत्खनन किसकी अनुमति से किया जा रहा है?
सबसे गंभीर पहलू यह है कि स्थानीय स्तर पर खनन कार्य वर्ष 2024 से लगातार संचालित होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद जिले के खनन विभाग, वन विभाग, अनुमंडल प्रशासन और अंचल कार्यालय के अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी नहीं होने की बात कही है। अधिकारियों ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमेश कुमार सिंह को वर्ष 2024 में पिरदाग गांव में पत्थर खनन के लिए प्लॉट नंबर 29पी, 31पी, 32पी और 34पी में कुल एक एकड़ सात डिसमिल जमीन का आवंटन किया गया था।
खनन का कार्य निर्धारित स्थल पर किया जाना था। लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि जिस जमीन के लिए खनन की अनुमति ली गई, वहां अब तक खनन कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसके विपरीत उसी गांव में दूसरे स्थान पर पत्थर का उत्खनन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, खनन के लिए निर्धारित प्लॉटों का हवाला देकर दूसरे स्थान पर खनन कार्य संचालित किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है, तो यह मामला केवल निर्धारित क्षेत्र से अधिक खनन का नहीं, बल्कि स्वीकृत स्थल से अलग स्थान पर उत्खनन किए जाने का भी है।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि खनन विभाग ने जिस जमीन के लिए अनुमति दी है, क्या विभाग के पास उस स्थल का नियमित निरीक्षण करने की व्यवस्था है? यदि निरीक्षण किया गया, तो निर्धारित स्थल पर खनन नहीं होने और दूसरे स्थान पर उत्खनन किए जाने की जानकारी विभाग को क्यों नहीं मिली?
दो साल से चल रहा खनन, सैकड़ों ट्रक पत्थर जमा होने का दावा
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, पिरदाग गांव में वर्ष 2024 से ही पत्थर खनन का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में भी खनन स्थल पर ड्रिलिंग कर पत्थर निकालने और विस्फोट के माध्यम से चट्टानों को तोड़ने का कार्य किए जाने की बात कही जा रही है।
बताया जाता है कि खदान के अंदर सैकड़ों ट्रक पत्थर जमा हैं। इससे खनन कार्य के बड़े पैमाने पर संचालित होने का संकेत मिलता है।
यदि खनन कार्य वर्ष 2024 से लगातार हो रहा है, तो सवाल उठता है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या खनन स्थल का कभी भौतिक निरीक्षण किया गया? यदि किया गया, तो निरीक्षण की रिपोर्ट में क्या उल्लेख है?
रिपोर्टर : बब्लू खान
सीटीओ की वैधता पर भी सवाल
खनन कार्य को लेकर एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल सीटीओ यानी कंसेंट टू ऑपरेट की वैधता से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खनन कार्य से संबंधित सीटीओ की अवधि समाप्त होने की बात कही जा रही है।
यदि सीटीओ की अवधि समाप्त हो चुकी है और इसके बावजूद खनन कार्य जारी है, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित इकाई को संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली हुई है।
हालांकि, सीटीओ की वास्तविक स्थिति, उसकी वैधता और नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति, खनन पट्टा, पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खनन कार्य सभी निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रहा है या नहीं।
खनन पदाधिकारी ने कहा-
जानकारी नहीं, दस्तावेज मिलने पर होगी जांच
इस मामले को लेकर जब लातेहार जिले के खनन पदाधिकारी नदीम सैफी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें फिरदा गांव में इस प्रकार के खनन कार्य की जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि खनन कहां और कैसे हो रहा है, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने पर मामले की जांच की जाएगी, तभी इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।
खनन पदाधिकारी के इस बयान के बाद सवाल उठता है कि यदि खनन कार्य वर्ष 2024 से संचालित होने का आरोप है, तो संबंधित विभाग को इसकी जानकारी अब तक क्यों नहीं मिली?
खनन विभाग के लिए यह भी जांच का विषय है कि आवंटित क्षेत्र के बाहर उत्खनन किए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी बनती है और अब तक इस संबंध में कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एसडीओ ने भी जताई अनभिज्ञता, जांच का दिया आश्वासन
लातेहार एसडीओ दिनेश कुमार से भी इस संबंध में जानकारी ली गई। उन्होंने खनन कार्य की जानकारी नहीं होने की बात कही और मामले की जांच कराने की बात कही।
एसडीओ का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अनुमंडल प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन मिलने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कब शुरू होती है और जांच के दौरान किन बिंदुओं को शामिल किया जाता है।
यदि खनन कार्य निर्धारित क्षेत्र से बाहर संचालित हो रहा है, तो यह केवल खनन विभाग का मामला नहीं है। इसमें भूमि की स्थिति, राजस्व अभिलेख, पर्यावरणीय अनुमति और सुरक्षा मानकों की जांच भी आवश्यक होगी।
डीएफओ और रेंजर से भी मांगी गई जानकारी
मामले को लेकर लातेहार के डीएफओ प्रवेश अग्रवाल और चंदवा रेंज के रेंजर नंद कुमार महतो से भी जानकारी लेने का प्रयास किया गया।
खनन स्थल की वास्तविक स्थिति, आसपास के वन क्षेत्र और संबंधित विभागीय अनुमति को लेकर इन अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
यदि खनन स्थल वन क्षेत्र के निकट है या खनन के दौरान वन भूमि प्रभावित हो रही है, तो वन विभाग की ओर से स्थल का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई गई विस्तृत जानकारी और विभागीय अभिलेखों की पुष्टि के बाद ही वन क्षेत्र से जुड़े किसी उल्लंघन के संबंध में निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
अंचल अधिकारी ने कहा- खनन की पुख्ता जानकारी नहीं
चंदवा अंचल अधिकारी सुमित कुमार झा से जब फिरदा गांव में संचालित खनन कार्य के संबंध में जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।
अंचल अधिकारी के अनुसार, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि चंदवा प्रखंड के लाधुप पंचायत अंतर्गत फिरदा गांव में इस प्रकार का खनन कार्य संचालित किया जा रहा है।
अंचल कार्यालय की भूमिका इस मामले में इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि खनन के लिए आवंटित जमीन और वास्तविक खनन स्थल के बीच अंतर होने की स्थिति में राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की पहचान की जानी आवश्यक है।
यह जांच भी जरूरी है कि जिस भूमि पर खनन किया जा रहा है, उसका स्वामित्व किसके पास है और उस भूमि पर उत्खनन के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि फिरदा गांव में वर्ष 2024 से पत्थर खनन का कार्य संचालित होने का आरोप है, तो संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?
जिले में अवैध खनन, जमीन से जुड़े मामलों और वन क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है। ऐसे में एक बड़े क्षेत्र में पत्थर खनन होने और खदान में बड़ी मात्रा में पत्थर जमा होने के बावजूद संबंधित विभागों का अनभिज्ञ होना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि किसी क्षेत्र में जमीन, बालू, कोयला या वन संपदा से जुड़ी गतिविधियां होती हैं, तो प्रशासन को इसकी जानकारी मिल जाती है। ऐसे में फिरदा गांव में कथित रूप से लंबे समय से संचालित पत्थर खनन की जानकारी अधिकारियों तक नहीं पहुंचना जांच का विषय है।
हालांकि, केवल अधिकारियों के जानकारी नहीं होने के बयान के आधार पर किसी की मिलीभगत या लापरवाही को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और वास्तविक स्थल की जांच आवश्यक है।
पिरदाग गांव में पत्थर खनन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए—
वर्ष 2024 में उमेश कुमार सिंह को किस शर्त पर और कितनी जमीन पर खनन का आवंटन दिया गया?
क्या खनन कार्य निर्धारित प्लॉट नंबर 29पी, 31पी, 32पी और 34पी में ही हो रहा है?
यदि खनन दूसरे स्थान पर हो रहा है, तो उस जमीन का स्वामित्व किसके पास है?
क्या खनन का वास्तविक क्षेत्र एक एकड़ सात डिसमिल से बढ़कर दो एकड़ 66 डिसमिल या लगभग पांच एकड़ तक पहुंच गया है?
खनन के लिए आवश्यक सीटीओ और अन्य अनुमतियां वर्तमान में वैध हैं या नहीं?
क्या खनन स्थल के समीप से गुजरने वाले हाईटेंशन तार को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है?
क्या खनन स्थल का संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया है?
यदि खनन नियमों के विरुद्ध पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
प्रशासन की जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
पिरदाग गांव में पत्थर खनन को लेकर सामने आए आरोपों ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर खनन कार्य वर्ष 2024 से संचालित होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारियों ने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही है।
वही खदान संचालक उमेश कुमार सिंह ने कहा
सभी मामला अधिकारी के संगयान मे है , और अभी सीटीओ मेरा फेल है ईसलीए मेरा काम बंद है।
ऐसे में अब जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।
खनन स्थल का भौतिक निरीक्षण, आवंटित जमीन के अभिलेखों का सत्यापन, खनन की वास्तविक सीमा का निर्धारण और सभी आवश्यक अनुमतियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि फिरदा गांव में खनन कार्य नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
यदि जांच में निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन, आवश्यक अनुमति के बिना उत्खनन या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पिरदाग गांव में पत्थर खनन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही मिल सकेगा। स्थानीय लोगों की नजर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
लातेहार उपायुक्त ने क्या कहा
इस संबंध में लातेहार उपायुक्त संदीप कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस पर जांच कमेटी का गठन करते हैं उसके बाद ही जांच रिपोर्ट आने पर कुछ कहा जा सकता है।
रिपोर्टर : बब्लू खान

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