अखिलेश यादव जीत की जद्दोजहद में जी-जान से जुटे
लखनऊ : सपा मुखिया अखिलेश यादव मिशन-2027 में जीत की जद्दोजहद में पूरे जी-जान से जुट गए हैं। जीत के लिए एक-एक सीटों का राजनीतिक समीकरण स्वयं देख रहे हैं। लोकसभा चुनाव की तरह पीडीए को और धार देने की रणनीति पर काम हो रहा है। ब्राह्मणों की नाराजगी पर भी नजर है। जातीय सम्मेलनों के साथ दलितों को लुभाने के लिए घर-घर दस्तक अभियान चला रहे हैं। पश्चिमी यूपी को मजबूत करने के लिए गुर्जर भाईचारा रैली और किसान सम्मेलन के जरिये जाटों को साथ लाने की कोशिश हो रही है।
पीडीए को देंगे और धार: लोकसभा चुनाव में पीडीए फार्मूले से सपा को 37 सीटें मिलीं। विधानसभा चुनाव-2027 में रणनीति बनी है कि 403 सीटों में करीब 85 फीसदी टिकट पीडीए को दिया जाए। पीडीए का साथ पाने के लिए अखिलेश ने सत्ता में आने पर महाराजा सुहेलदेव, सम्राट मिहिर भोज, कांशीराम की प्रतिमा लगाने का वादा किया है। महिला विंग की कमान सवर्ण से लेकर पिछड़ों को दी है। सीमा राजभर को राष्ट्रीय और रुकमणी निषाद को प्रदेश की कमान सौंपी है। अखिलेश ने इसके सहारे महिला विरोधी होने के आरोपों पर पलटवार किया है।
मुस्लिम-यादव सपा के हमेशा वोट बैंक रहे हैं। अखिलेश वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा, निषाद का साथ पाने में सफल रहे थे। यह बात अलग है कि 2022 में स्वामी प्रसाद मौर्य फैक्टर फेल हो गया था। अखिलेश पिछड़ों में कुर्मी, लोध, जाट, गुर्जर को बढ़ावा देने में जुटे हैं। पश्चिमी यूपी में गुर्जरों के साथ जाट और पूर्वांचल में कुर्मी, राजभर और निषाद जातियों के उम्मीदवारों को उतारने का फार्मूला अपनाया गया है।
रिपोर्टर : लखन यादव

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