योगदा सत्संग आश्रम राँची के योग दिवस प्रसारण ने देश-विदेश में हज़ारों लोगों तक बनाई पहुँच
लखनऊ : ध्यान योग द्वारा शांति की अनुभूति’ विषय पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में साधकों ने किया व्यावहारिक प्रविधियों का अनुभव *राँची:* अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (वाईएसएस) ने रविवार, 14 जून को अपने राँची आश्रम में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में वाईएसएस के वरिष्ठ संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने *‘ध्यान योग द्वारा शांति की अनुभूति’* विषय पर प्रेरक प्रवचन दिया।
इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भारत और विदेशों में स्थित वाईएसएस केंद्रों, ध्यान समूहों, शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट वेलनेस समूहों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर किया गया। प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यमों से लगभग *25,000 लोगों* ने इस सत्र में एक साथ भाग लिया।
### संतुलित जीवन के लिए व्यावहारिक प्रविधियाँ
90 मिनट के इस विशेष सत्र में भजनों, निर्देशित ध्यान-सत्र, सकारात्मक संकल्पों तथा सृजनात्मक दृश्यांकन (Creative Visualization) के माध्यम से प्रतिभागियों को आंतरिक शांति, एकाग्रता एवं संतुलित जीवन के लिए व्यावहारिक आध्यात्मिक प्रविधियों का गहन अनुभव कराया गया।
स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने अपने संबोधन में कहा:
> “योग जीवन जीने का एक संपूर्ण विज्ञान है। यह शरीर, मन और आत्मा को सामंजस्यपूर्ण रूप से विकसित करते हुए मनुष्य को उसके अंतर्निहित शांति स्रोत तथा ईश्वर से जोड़ता है।“
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### परमहंस योगानन्दजी के संदेशों का उल्लेख
स्वामीजी ने विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु तथा गौरवग्रंथ *‘योगी कथामृत’ (Autobiography of a Yogi)* के लेखक परमहंस योगानन्दजी की क्रियायोग शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ध्यान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्य शांति का अनुभव कर सकता है। उन्होंने योगानन्दजी के इन प्रेरक वचनों को उद्धृत किया:
* "ध्यान वह स्रोत है जिससे ईश्वर की शांति आपकी आत्मा में प्रवाहित होती है।”
* "शांति खरीदी नहीं जा सकती। आपको यह जानना होगा कि उसे अपने भीतर, अपनी दैनिक ध्यान साधना की निश्चलता में कैसे निर्मित करें।”
स्वामीजी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार इन वचनों को पढ़ा था, तब वे इसके गहन अर्थ को पूरी तरह नहीं समझ पाए थे। किंतु वर्षों के निरंतर ध्यान-अभ्यास से उन्होंने जाना कि ध्यान का स्वाभाविक परिणाम ही आंतरिक शांति है। नियमित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति जीवन की चुनौतियों, तनावों और अनिश्चितताओं के बीच भी पूरी तरह शांत, संतुलित और केंद्रित रह सकता है।
### गृह-अध्ययन के लिए वाईएसएस पाठमाला की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ध्यान की मूलभूत प्रविधियों का अभ्यास कराया गया तथा एक प्रेरणादायी संकल्प के माध्यम से जीवन की चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने का संदेश दिया गया।
सत्र के समापन पर सभी उपस्थित और ऑनलाइन जुड़े प्रतिभागियों को परमहंस योगानन्दजी द्वारा तैयार की गई *योगदा सत्संग पाठमाला (YSS Lessons)* की जानकारी दी गई। इन गृह-अध्ययन पाठों के माध्यम से कोई भी साधक अपने घर पर रहकर ध्यान की वैज्ञानिक विधियों तथा आध्यात्मिक जीवन के सिद्धांतों का क्रमबद्ध (Step-by-step) अध्ययन कर सकता है।
### योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (YSS) के बारे में
योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया की स्थापना आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानन्दजी द्वारा वर्ष 1917 में की गई थी। उनकी अमर कृति ‘योगी कथामृत’ ने दुनियाभर में लाखों लोगों के जीवन को रूपांतरित किया है। वर्तमान में वाईएसएस भारत एवं पड़ोसी देशों में अपने विभिन्न आश्रमों, ध्यान केंद्रों एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से ध्यान और संतुलित जीवन की कालजयी शिक्षाओं का निरंतर प्रसार कर रही है।
रिपोर्टर : चौधरी मुकेश सिंह
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