मुस्लिम दलितों के आरक्षण पर उठी आवाज, नूरूल हूदा और डॉ. सलीम ने रखीं 5 सूत्रीय मांगें

लखनऊ : नूरूल हूदा राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष यूथ और डॉ सलीम ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब लखनऊ में प्रेस वार्ता पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर किए  मुस्लिम दलित जातियां का आरक्षण 10 अगस्त 1950 को प्रेसीडेंसीअल आर्डर ला कर नेहरू जी ने हिन्दू छोड़ सभी धर्मों के दलित जातियों के आरक्षण को रोक दिया 1956 में सिख समुदाय के दलित जातियों और 1990 में बौद्ध धर्म के दलित जातियों के लिए संशोधन कर दिया पर मुस्लिम और ईसाई दलित जातियां आजादी के 80 साल बाद भी वंचित हैं मोदी जी भी पसमांदा की चिंता करते हैं वही प्रेसीडेंसीअल आर्डर हटा दें नूरूल हूदा ने कहा कि  भारत का पहला मुस्लिम नेता शकील अहमद खान ने अप्रैल 1999में बिहार विधान परिषद में संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश,1950 के हटाने का सवाल किया और जुलाई 2000में लालू प्रसाद ने गैर सरकारी प्रस्ताव लाकर ध्वनि मत से पारित कराया तथा 5दिसम्बर 2000को राबड़ी सरकार ने अरजाल मुसलमानों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए भारत सरकार को सिफारिश भेजा तब मुलायम सरकार ने भी भेजा। बिहार राज्य भारत का पहला राज्य है जिसने अरजाल मुसलमानों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए भारत सरकार से सिफारिश किया।उन्होंने ने समाजवादी के PDA पर तीखा प्रहार करते हुए  कहा कि संवैधानिक अधिकार और राजनैतिक भागीदारी पर चुप्पी तोड़े अखिलेश यादव और बताए कि 16% पसमांदा का वोट समाजवादी लेती हैं 56 राज्य सभा में एक भी मुस्लिम दलित जातियों या पसमांदा को नहीं भेजी 37 संसद है एक भी पसमांदा नहीं है 17 जातियों मुस्लिम अभी तक किसी सदन का मुँह नहीं देखी PDA में OBC मुस्लिम समुदाय कहा है अध्यक्ष जी दर्द बेचारा परेशान है कहा से उठे एक दो दर्द नहीं सारा बदन है छलनी हम वोट बैंक बने हैं तो अच्छा लगता है राजनैतिक भागीदारी की बात कर रहे हैं तो मिर्ची क्यों लग रहीं हैं जिसको देगें पहले उसी तो मांगने का हक़ है समय बैठक कर समस्या का समाधान करने के बारे में सोचे सिर्फ एस पी बीएसपी कांग्रेस से नहीं बल्कि ये आवाज़ बुलंद सभी सेकुलर पार्टियों से है हिस्सेदारी बीजेपी से मांगे वोट सेकुलर के नाम देपरिवार की पार्टी है इस लिए बार बार रामगोपाल यादव जी राज्य सभा में जाएगे और पसमांदा और मुस्लिम दलित जातिया सिर्फ वोट बैंक बन कर मुस्लिम के नाम पर वोट देते हैं राजनैतिक भागीदारी के नाम पर चुप्पी तोड़े अखिलेश यादव वर्ना 27 में हम जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं बेशर्मी की हद है 17 जातियों के एक भी नुमाइंदे न तो राज्य सभा  , लोक सभा  , विधानपरिषद  और विधान सभा का मुहँ नहीं देख पाए हमारे वोट , नोट और सपोर्ट के बदौलत चार बार मुख्यमंत्री एक बार रक्षा मंत्री और इसके पहले 56 राज्य सभा कभी हमारा समाज याद नहीं आया अंनरा बाटे सिरनी नेकहा कि(प्रसाद)घरे घराना खाए ! डॉ सलीम ने कहा हमारी इन पांच मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो प्रदेश भर में आंदोलन करेगें 

मुख्य मांगे -

1 . संविधान की धारा 341(3) में 10 अगस्त 1950 से धार्मिक प्रतिबंध हटाया। 
2 . मुस्लिम दलित जातियों को शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक विकास के लिए "अरज़ाल आयोग" का गठन किया जाए।
3 . मुस्लिम पवरिया/पमरिया समेत अन्य छूटी हुई जातियों को उत्तर प्रदेश OBC के लिस्ट में शामिल किया जाए।
4 . उत्तर प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में बिहार के तर्ज पर कर्पूरी फार्मूला लागू किया जाए।
5.ओबीसी की 27% में से 8.44 OBC मुस्लिम कोटा अलग किया जाए।

रिपोर्टर : चौधरी मुकेश सिंह 

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