सिसवा को तहसील बनाने की मांग हुई तेज: एमएलसी प्रतिनिधि राजन विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

महराजगंज : सिसवा को तहसील का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। इस बार एमएलसी प्रतिनिधि राजन विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम अपने रक्त से पत्र लिखकर सरकार से सिसवा को शीघ्र तहसील घोषित करने की मांग की है। उनके इस अनोखे विरोध और भावनात्मक अपील की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है।

शुक्रवार को पत्र लिखने से पहले राजन विश्वकर्मा ने नगर स्थित भुअरी माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली और अपनी मांग की सफलता के लिए आशीर्वाद लिया। इसके बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत अपनी नस से रक्त निकलवाया और उसी रक्त से मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर सिसवा को तहसील का दर्जा देने की मांग दोहराई।

राजन विश्वकर्मा ने कहा कि सिसवा को तहसील बनाने की मांग महराजगंज जनपद के गठन के समय से लगातार उठती रही है। इस मुद्दे पर समय-समय पर सामाजिक, व्यापारिक और छात्र संगठनों ने आंदोलन किए हैं। उन्होंने बताया कि गत 5 जनवरी को अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने भी नगर बंद कर सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण मांग की ओर आकर्षित किया था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार द्वारा नई तहसीलों के गठन के लिए कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी गई थी। उस रिपोर्ट में महराजगंज जिले से सिसवा तथा कुशीनगर जिले से खड्डा और कप्तानगंज को नई तहसील बनाए जाने की संस्तुति की गई थी। बाद में वर्ष 2012 में खड्डा और कप्तानगंज को तहसील का दर्जा मिल गया, लेकिन सभी आवश्यक मानकों पर खरा उतरने के बावजूद सिसवा आज तक इस अधिकार से वंचित है।

राजन विश्वकर्मा का कहना है कि सिसवा क्षेत्र के हजारों लोगों को आज भी राजस्व और तहसील से जुड़े कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे लोगों का समय और धन दोनों व्यर्थ होता है तथा आमजन को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सिसवा को जल्द से जल्द तहसील घोषित करने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने इस मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने आत्मदाह जैसे कदम का भी उल्लेख किया। हालांकि, किसी भी प्रकार का आत्मघाती कदम अत्यंत खतरनाक है और उसका समर्थन नहीं किया जा सकता। जनहित से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक माध्यम ही सबसे उचित और सुरक्षित रास्ता हैं।

रिपोर्टर : मनीष कुमार कन्नौजिया

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