शिक्षा की अलख: विधायक प्रशांत बंब का संकल्प; 'मेरे क्षेत्र का एक भी गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे', गाँव-गाँव में खुलेगी डिजिटल लैब!

छत्रपति संभाजी नगर : राजनीति के शोर में अक्सर आम आदमी की ज़रूरतें दब जाती हैं, लेकिन गंगापुर-खुल्ताबाद निर्वाचन क्षेत्र के विधायक प्रशांत बंब ने अपने सेवाकार्यों से मानवता की एक नई मिसाल पेश की है। "मेरे क्षेत्र के हर विद्यार्थी को विश्वस्तरीय शिक्षा मिलनी चाहिए और गरीबी कभी उनके सपनों के आड़े नहीं आनी चाहिए," इसी नेक उद्देश्य के साथ विधायक बंब रात-दिन जुटे हुए हैं। केवल खोखले वादे करने के बजाय ज़मीनी स्तर पर काम करते हुए, उन्होंने अब तक सैकड़ों ज़रूरतमंद छात्रों को मुफ्त किताबें, शैक्षणिक किट और आधुनिक युग की ज़रूरत को देखते हुए मुफ्त लैपटॉप प्रदान किए हैं।

विधायक प्रशांत बंब अपनी हर सभा और गांव के दौरों में बड़ी आत्मीयता से एक ही आह्वान करते हैं: "जिन छात्रों में वाकई पढ़ने का जज्बा है, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, वे संकोच न करें और सीधे मुझसे संपर्क करें।" इतना ही नहीं, जो युवा गांवों में रहकर MPSC या UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए उन्होंने एक क्रांतिकारी घोषणा की है। विधायक बंब ने कहा है कि ऐसे गांवों में वे स्वयं अपनी ओर से एक स्वतंत्र और आधुनिक डिजिटल लैब (लाइब्रेरी) उपलब्ध कराएंगे। उनका मानना है कि संसाधनों के अभाव में किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य अंधकार में नहीं जाना चाहिए।


विधायक प्रशांत बंब की भूमिका:

"मेरे लिए कुर्सी से ज़्यादा मेरे क्षेत्र के बच्चों के सपनों की कीमत है। गरीब के घर का बच्चा भी कलेक्टर या बड़ा अधिकारी बनना चाहिए। यदि आपके पास लगन है, तो मैं आपको हर सुविधा, लैपटॉप और गाँव में ही लैब देने के लिए तैयार हूँ। आप बस मन लगाकर पढ़िए और अपने परिवार व गाँव का नाम रोशन कीजिए।"

छात्रों की कृतज्ञता:

"हमारे घर में एक अच्छा फोन लेने की हैसियत नहीं थी, वहां साहब ने हमें पढ़ाई के लिए कीमती लैपटॉप दिया है। अब वे हमारे गाँव में ही लैब बनवा रहे हैं। विधायक साहब हमारे लिए केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक बड़े भाई की तरह ढाल बनकर खड़े हैं। उनके इसी भरोसे ने हमें आगे बढ़ने की हिम्मत दी है।"

ग्रामीणों की भावना:

"हमने कई जनप्रतिनिधि देखे, लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए इतनी तड़प रखने वाले प्रशांत बंब साहब पहले व्यक्ति हैं। आज उनके कारण गाँव के गरीब का बेटा भी शहर के बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पढ़ रहा है। साहब के इस कार्य से हमारा सिर गर्व से ऊँचा हो गया है।"

रिपोर्टर : शिवाजी तांबे 

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