डिजिटल खेती स्कूल के माध्यम से जलवायु अनुकूल तकनीक का प्रसार; किसानों को आधुनिक मार्गदर्शन

गडचिरोली :  नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना (चरण 2.0) के अंतर्गत गडचिरोली जिले का चयन किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बदलते जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप किसानों एवं भूमिहीन परिवारों को सक्षम बनाना है। इसके तहत कृषि आधारित आजीविका के साधन उपलब्ध कराते हुए खेती को अधिक किफायती और टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

बदलते मौसम का खेती पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए गांव स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। इसी दिशा में “डिजिटल खेती स्कूल” अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से किसानों को जलवायु अनुकूल तकनीक (CRT) के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह पहल नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना और पानी फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से संचालित की जा रही है।
“डिजिटल खेती स्कूल” एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां विशेषज्ञों द्वारा किसानों को वैज्ञानिक एवं फसल-विशिष्ट उन्नत खेती तकनीकों की जानकारी दी जाती है। यह सत्र ज़ूम और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित किए जाते हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के किसान भी आसानी से जुड़ सकते हैं।
8 अप्रैल 2026 को शाम 7:30 बजे आयोजित विशेष सत्र में ‘जैविक/प्राकृतिक इनपुट उत्पादन’ विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसमें बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीम अर्क तथा दशपर्णी अर्क जैसे उपयोगी जैविक उपायों की जानकारी साझा की जाएगी।
यह डिजिटल खेती स्कूल गांव स्तर पर कृषि विभाग के अधिकारियों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी प्रीति हिरलकर ने अधिक से अधिक किसानों से इस पहल में भाग लेने और इन तकनीकों को अपनाने की अपील की है।

रिपोर्टर : संजय यमसलवार 

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