जिमलगट्टा जंगल में आग का रौद्र रूप; वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
गड़चिरोली : सिरोंचा वन विभाग के अंतर्गत आने वाले जिमलगट्टा वन परिक्षेत्र में लगी भीषण जंगल आग ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है। रेपणपल्ली–जिमलगट्टा राष्ट्रीय राजमार्ग 353C के पास महज 50 मीटर की दूरी पर भड़की इस आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
इस आग से बड़ी मात्रा में कीमती वन संपदा के जलकर नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है। पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, जिससे जैव विविधता पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है। आग गुंडेरा और अर्कपल्ली गांवों के नजदीक पहुंच चुकी है, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही वन्यजीवों के जीवन पर भी संकट गहराता जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आग लगने के बाद भी वन विभाग की ओर से समय पर और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते आग लगातार फैलती जा रही है और स्थिति और गंभीर होती जा रही है। आग के कारण वन्यजीवों का पलायन बढ़ने की संभावना है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि जिमलगट्टा वन परिक्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा आग पर काबू पाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे वन संपदा तेजी से नष्ट हो रही है। संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास भी विफल रहा, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल अग्निशमन उपाय शुरू कर आग पर नियंत्रण पाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आग पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा पर्यावरणीय संकट बन सकती है।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार


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