इंजेक्शन के बाद 5 वर्षीय मासूम की मौत, सिरोंचा पत्रकार संघटना आक्रामक; दोषियों पर फौजदारी कार्रवाई की मांग

गडचिरोली : गडचिरोली जिले के सिरोंचा ग्रामीण अस्पताल में आयोजित निःशुल्क हृदय जांच शिविर के दौरान 5 वर्षीय मासूम की इंजेक्शन दिए जाने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। घटना को लेकर सिरोंचा तालुका पत्रकार संघटना आक्रामक हो गई है। पत्रकार संघटना ने पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और सखोल जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले संबंधित चिकित्सकीय अथवा स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ फौजदारी कार्रवाई करने की मांग की है।

रंगयापल्ली निवासी मोहन और गंगू चेन्नूरी के 5 वर्षीय पुत्र श्रावीण चेन्नूरी को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से ग्रामीण अस्पताल, सिरोंचा में आयोजित निःशुल्क हृदय जांच शिविर में लाया गया था। परिजनों के अनुसार, अस्पताल के वार्ड में बच्चे को इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। देखते ही देखते बच्चे की हालत गंभीर हो गई और उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

इंजेक्शन को लेकर उठे गंभीर सवाल

पत्रकार संघटना ने सवाल उठाया है कि बच्चे को कौन-सा इंजेक्शन दिया गया था? इंजेक्शन देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? किस चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी के निर्देश पर इंजेक्शन दिया गया? इंजेक्शन की मात्रा कितनी थी? क्या बच्चे की एलर्जी अथवा अन्य स्वास्थ्य स्थिति की जांच की गई थी? इन सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

संघटना ने मांग की है कि घटना में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन का नाम, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट, मात्रा, प्रिस्क्रिप्शन, उपचार नोंद, मेडिकल रिकॉर्ड, संबंधित डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के बयान तथा अस्पताल के CCTV फुटेज की जांच की जाए। साथ ही बच्चे की मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के माध्यम से जांच कराई जाए।

लापरवाही साबित हुई तो हो फौजदारी कार्रवाई

पत्रकार संघटना का कहना है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही, नियमों का उल्लंघन अथवा गैर-जिम्मेदाराना तरीके से उपचार किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई तक मामला सीमित न रखा जाए, बल्कि कानून के अनुसार फौजदारी कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही मृत बच्चे के परिवार को शासन के नियमानुसार आर्थिक सहायता और उचित नुकसानभरपाई उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।

15 दिन में न्याय नहीं मिला तो आंदोलन

इस गंभीर मामले में शीघ्र न्याय दिलाने की मांग करते हुए सिरोंचा तालुका पत्रकार संघटना ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन लोकतांत्रिक एवं कानूनी मार्ग से आंदोलन करेगा। पत्रकार संघटना ने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य दोषियों को बचाना नहीं, बल्कि घटना की सच्चाई सामने लाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है।

पत्रकार संघटना ने प्रशासन से रखीं प्रमुख मांगें

- घटना की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- बच्चे को दिए गए इंजेक्शन का नाम, बैच नंबर, मात्रा और रिकॉर्ड की जांच की जाए।
- संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड एवं उपचार नोंद सुरक्षित रखी जाए।
- ग्रामीण अस्पताल के CCTV फुटेज की जांच की जाए।
- संबंधित डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के बयान दर्ज किए जाएं।
- चिकित्सकीय लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ फौजदारी कार्रवाई की जाए।
- मृतक बच्चे के परिवार को शासन नियमानुसार आर्थिक सहायता एवं नुकसानभरपाई दी जाए।
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।

पत्रकार संघटना का प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद

इस संबंध में दिए गए निवेदन के दौरान तालुका पत्रकार संघटना के अध्यक्ष सागर मूलकला, उपाध्यक्ष मुरलीधर मारगोनी, सचिव अशोक कुम्मरी सहित पत्रकार एवं ग्रामस्थ उपस्थित थे।

फिलहाल बच्चे की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण जांच का विषय है। इंजेक्शन दिए जाने के बाद मौत होने का समयगत संबंध सामने आया है, लेकिन इंजेक्शन ही मौत का कारण था, यह निष्कर्ष स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच और उपलब्ध मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर ही निश्चित किया जा सकता है। इसी कारण पत्रकार संघटना ने मामले की निष्पक्ष एवं सखोल जांच की मांग को जोरदार तरीके से उठाया है।

रिपोर्टर :  चंद्रशेखर पुलगम

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