हर सर्पदंश की होगी अनिवार्य रिपोर्टिंग, एएसवी के स्टॉक और उपचार की भी होगी निगरानी
गडचिरोली : राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को रोकने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महाराष्ट्र में सर्पदंश को ‘अधिसूचित बीमारी’ घोषित किया गया है। इसके तहत राज्य के सरकारी एवं निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा चिकित्सकों के लिए सर्पदंश के प्रत्येक संदिग्ध, संभावित अथवा पुष्ट मामले की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण को देना अनिवार्य होगा। सर्पदंश से होने वाली मौतों की भी अनिवार्य रूप से रिपोर्टिंग करनी होगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि इस निर्णय से सर्पदंश की घटनाओं की प्रभावी निगरानी, समय पर उपचार तथा सर्पविषरोधी सीरम (ASV) की उपलब्धता और स्टॉक का बेहतर नियोजन किया जा सकेगा।
ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में सर्पदंश का खतरा अधिक रहता है। सर्पविष संभावित रूप से जानलेवा हो सकता है। इसलिए समय पर पहचान, उचित प्राथमिक उपचार, तत्काल अस्पताल में भर्ती तथा आवश्यकता के अनुसार एएसवी उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने सर्पदंश की वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित जानकारी संकलित करने के लिए अधिसूचना लागू की है।
हर सर्पदंश की तत्काल होगी रिपोर्टिंग
राज्य की प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था और चिकित्सक को उनके संज्ञान में आए अथवा उपचाराधीन सर्पदंश के प्रत्येक संदिग्ध, संभावित या निश्चित मामले की जानकारी संबंधित जिला स्वास्थ्य अधिकारी या जिला शल्यचिकित्सक को देनी होगी। गंभीर अथवा घातक मामलों तथा सर्पदंश से हुई मौतों की सूचना उपलब्ध संचार माध्यमों के जरिए तत्काल देना अनिवार्य किया गया है।
सर्पदंश से संबंधित जानकारी स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS/DHIS-2), एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) अथवा सरकार द्वारा निर्धारित अन्य रिपोर्टिंग प्रणाली में दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में सर्पदंश के मामलों का अद्यतन और विश्वसनीय आंकड़ा उपलब्ध हो सकेगा।
राज्य से जिला स्तर तक नोडल व्यवस्था
सर्पदंश की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राज्य स्तर पर संचालक (अस्पताल) तथा जिला स्तर पर जिला शल्यचिकित्सक और जिला स्वास्थ्य अधिकारी को सर्पदंश नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा। महानगरपालिका क्षेत्रों में चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी अथवा अतिरिक्त चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।
इन अधिकारियों के माध्यम से सर्पदंश के मामलों की निगरानी, उपचार व्यवस्था की समीक्षा, रोकथाम संबंधी उपाय तथा आवश्यक आंकड़ों का संकलन किया जाएगा।
एएसवी के स्टॉक पर भी रहेगी नजर
सर्पदंश का उपचार करने वाली प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था को सर्पविषरोधी सीरम (ASV) की उपलब्धता, प्राप्ति, उपयोग और शेष स्टॉक का अद्यतन रिकॉर्ड रखना होगा। आवश्यकता पड़ने पर यह जानकारी जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपलब्ध करानी होगी।
इस व्यवस्था से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां सर्पदंश के मामले अधिक सामने आते हैं। ऐसे क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में एएसवी का स्टॉक उपलब्ध रखने के लिए प्रभावी नियोजन किया जा सकेगा।
मरीज के उपचार की पूरी जानकारी होगी दर्ज
सर्पदंश के मरीज के रिकॉर्ड में दंश की तारीख और स्थान, मरीज की उम्र एवं लिंग, सर्पदंश की परिस्थितियां, विषबाधा के लक्षण, किए गए उपचार, इस्तेमाल की गई एएसवी की शीशियों की संख्या, आवश्यकता पड़ने पर किए गए रेफरल, उपचार का परिणाम तथा मृत्यु होने की स्थिति में उसकी जानकारी दर्ज करनी होगी।
जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अस्पताल, चिकित्सक या स्वास्थ्य संस्था से उपचार, एएसवी के उपयोग, उपचार के परिणाम और मरीज के रेफरल से संबंधित अतिरिक्त जानकारी भी मांग सकेगा।
कारणों का अध्ययन कर किए जाएंगे रोकथाम के उपाय
सर्पदंश के मामलों और मौतों की नियमित निगरानी के साथ घटनास्थल, परिस्थितियों, मौसम तथा अन्य संबंधित कारकों का भी अध्ययन किया जाएगा। इस जानकारी के आधार पर स्थानीय स्तर पर सर्पदंश की घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी रोकथाम उपाय तैयार किए जा सकेंगे।
सर्पदंश से बचाव, तत्काल रिपोर्टिंग, प्राथमिक उपचार, समय पर रेफरल और उचित चिकित्सा उपचार के संबंध में जनजागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को दी गई है।
‘समय पर उपचार ही जीवन बचाने का मंत्र’
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि सर्पदंश के मरीज को समय पर उचित उपचार मिलना उसकी जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए सरकार का विशेष जोर सर्पदंश के प्रत्येक मामले की रिपोर्टिंग, पर्याप्त एएसवी स्टॉक, विशेषज्ञ उपचार के लिए तत्काल रेफरल व्यवस्था और प्रभावी निगरानी पर है।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा कि “सर्पदंश की हर घटना दर्ज करें, समय पर उपचार दें और अनमोल जीवन बचाएं।”
सर्पदंश के उपचार एवं प्रबंधन के लिए भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार अथवा सक्षम प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर निर्धारित उपचार दिशानिर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार के इस निर्णय से महाराष्ट्र में सर्पदंश की रोकथाम, निगरानी और उपचार व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, तत्पर और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम
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