तेलंगाना की पारंपरिक संस्कृति की गूंज अब गड़चिरोली तक! चिचेला स्कूल में धूमधाम से मना ‘बतुकम्मा’ महोत्सव

मुलचेरा (चिचेला) गड़चिरोली : तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पारंपरिक रूप से बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने वाला फूलों का पर्व ‘बतुकम्मा’ अब महाराष्ट्र के अंतिम छोर पर स्थित गड़चिरोली जिले में भी अपनी सांस्कृतिक छाप छोड़ रहा है। तेलंगाना की सीमा से सटे इस जिले के गांवों में इस उत्सव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय, चिचेला में बतुकम्मा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस आयोजन में विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

रंग-बिरंगे फूलों से सजीं आकर्षक बतुकम्मा

बतुकम्मा उत्सव की विशेषता विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से पारंपरिक आकृतियां तैयार करना है। विद्यालय की छात्राओं ने सुबह से ही उत्साह के साथ आसपास के परिसर से विभिन्न प्रकार के फूल एकत्र किए। अभिभावकों के सहयोग से विद्यार्थियों ने सुंदर और आकर्षक बतुकम्मा तैयार कीं। फूलों की रंग-बिरंगी सजावट ने पूरे विद्यालय परिसर को उत्सवमय बना दिया।

पारंपरिक गीतों और नृत्य से गूंजा विद्यालय परिसर

तैयार की गई बतुकम्मा की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पारंपरिक गीतों और वाद्ययंत्रों की धुन पर विद्यार्थियों ने नृत्य कर उत्सव का आनंद लिया। विशेष रूप से छात्राओं के साथ कुछ छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। आरती के पश्चात बतुकम्मा का विसर्जन किया गया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की ओर से उपस्थित लोगों के लिए प्रसाद एवं नाश्ते की व्यवस्था की गई।

विद्यालय और ग्रामवासियों की सहभागिता से आयोजन सफल

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय प्रबंधन समिति, विद्यालय से जुड़ी अन्य समितियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के संयुक्त सहयोग से किया गया। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास ओडेंगवार, ग्राम पंचायत सदस्य श्री विलासभाऊ सडमेक, विद्यार्थी संघ के उपाध्यक्ष श्री रोशन चौधरी, प्रधानाध्यापक संजय कोंकमुट्टीवार, विद्यालय मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा महिला पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विशेष प्रयास किए।

परंपरा के संरक्षण के साथ विद्यार्थियों को संस्कृति से जोड़ने की पहल

गड़चिरोली जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में बतुकम्मा उत्सव अब केवल घरों और गांवों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विद्यालयों में भी इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को विभिन्न परंपराओं, लोकगीतों, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का महत्व समझने का अवसर मिलता है।

चिचेला जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में आयोजित बतुकम्मा महोत्सव ने शिक्षा के साथ संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया।

रिपोर्टर : मारोती कोलावार

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