अनंत चतुर्दशी पर उपेक्षित कोटवा का कांवरिया पथ
कोटवा : अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बेलवा घाट से जल भरकर अरेराज स्थित प्रसिद्ध सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने वाले लाखों कांवरियों के लिए कोटवा होकर गुजरने वाला ऐतिहासिक कांवरिया पथ इस बार भी प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार नजर आ रहा है। चकिया और पिपरा के रास्ते कोटवा होकर अरेराज जाने वाले कांवरिए अनंत चतुर्दशी से करीब 7-8 दिन पहले से ही इस मार्ग पर पहुंचने लगते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन का विशेष ध्यान मुख्य रूप से मोतिहारी-छतौनी-बलुआ-मच्छरगवां मार्ग से होकर अरेराज जाने वाले डाक बम पर रहता है। वहीं, कोटवा होकर जाने वाले कांवरियों की संख्या और उनकी लंबी यात्रा को देखते हुए इस मार्ग पर पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
रात के अंधेरे में नहर किनारे से गुजरते हैं कांवरिए
कोटवा क्षेत्र में महारानी भोपत, राजापुर, अहिरौलिया और सिहोरवा नहर के रास्ते बड़ी संख्या में कांवरिए गुजरते हैं। स्थानीय लोगों द्वारा पिछले कुछ वर्षों से कुछ स्थानों पर छोटे कैम्प लगाए जाते हैं, लेकिन कुछ दूरी आगे बढ़ने के बाद रास्ता अंधेरे में डूब जाता है। ऐसे में रात के समय कांवरियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
80 किमी की यात्रा के बाद कोटवा में पड़ाव
कोटवा कांवरियों के लिए प्रमुख पड़ाव स्थल माना जाता है। करीब 80 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करने के बाद कांवरिए कोटवा पहुंचते हैं और यहां विश्राम करने के बाद लगभग 20 किलोमीटर की शेष यात्रा कर अरेराज पहुंचते हैं।
मोतिहारी मार्ग की तुलना में कोटवा वाला कांवरिया पथ कई दिनों तक चलने वाली यात्रा का हिस्सा है। इसके बावजूद इस मार्ग पर ठहराव, पेयजल, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर पर्याप्त सरकारी व्यवस्था नहीं होने की बात स्थानीय लोग कह रहे हैं।
न कैम्प, न स्वास्थ्य शिविर
कोटवा कॉलेज, कोटवा हाईस्कूल, मध्य विद्यालय परिसर, देवी माई मंदिर परिसर सहित कई स्थान वर्षों से कांवरियों के ठहराव के प्रमुख स्थल रहे हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में कांवरिए रुकते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से यहां न तो टेंट सिटी या अस्थायी कैम्प की समुचित व्यवस्था की जाती है और न ही पर्याप्त स्वास्थ्य शिविर एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से कथित तौर पर कांवरियों के लिए अलग से फंड उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है।
पिछले साल पथराव के बाद भी नहीं बना स्थायी समाधान
पिछले वर्ष कोटवा हाईस्कूल में कांवरियों के ठहरने को लेकर शिक्षकों और कांवरियों के बीच विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने के बाद पथराव और झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। मामला थाने तक पहुंचा था, जिसके बाद थानाध्यक्ष और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से हाईस्कूल परिसर कांवरियों के लिए खोला गया था।
इस वर्ष 17 सितंबर को स्कूलों में परीक्षा होने का हवाला देते हुए कोटवा हाईस्कूल के प्रभारी द्वारा प्रखंड कार्यालय को पत्र भेजकर इस बार स्कूल का गेट कांवरियों के लिए नहीं खोलने की बात कही गई है। ऐसे में हजारों कांवरियों के ठहरने की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ओवरब्रिज का जाम भी बनेगा परेशानी
कोटवा ओवरब्रिज के आसपास लगातार लगने वाला जाम भी कांवरियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। तेज धूप और गर्मी के बीच पैदल चलने वाले शिवभक्तों को जाम के कारण अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है।
अब प्रशासन से उम्मीद
सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत लाखों शिवभक्त कांधे पर कांवर लेकर कोटवा होते हुए अरेराज पहुंचते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों और कांवरिया सेवा से जुड़े लोगों की मांग है कि प्रशासन इस ऐतिहासिक कांवरिया पथ पर रोशनी, पेयजल, चिकित्सा शिविर, अस्थायी कैम्प, साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करे।
अब सवाल यही है कि लाखों कांवरियों की आस्था से जुड़े इस मार्ग पर प्रशासन कब जागेगा? क्या इस बार शिवभक्तों को जरूरी सुविधाएं मिलेंगी, या वे भीषण गर्मी में भगवान भरोसे ही अपनी यात्रा पूरी करने को मजबूर रहेंगे?
रिपोर्टर : दीपक कुमार पाण्डेय
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