आदिवासी बजट का 50% इस्तेमाल नहीं हुआ: डेडियापाड़ा MLA चैतर वसावा

डेडियापाड़ा - डेडियापाड़ा MLA चैतर वसावा ने मीडिया से कहा कि देश को आज़ाद हुए दशकों बीत जाने के बाद भी आदिवासियों के लिए बड़ा बजट दिया जाता है, फिर भी उनका विकास क्यों नहीं हो रहा - यह सवाल हर कोई पूछता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनके सतहत्तरवें सवाल के जवाब में पता चला कि पिछले दो सालों में, पिछले साल नर्मदा ज़िले में न्यू गुजरात पैटर्न स्कीम के तहत दिए गए आदिवासी विकास बजट में से ₹5,120 करोड़ दिए गए थे, लेकिन सिर्फ़ ₹2,410 करोड़ ही खर्च हुए, यानी लगभग 50 प्रतिशत रकम का इस्तेमाल हुआ। नर्मदा ज़िले में ₹92 करोड़ 63 लाख 49 हज़ार का बजट दिया गया। तालुका और ज़िला लेवल की मीटिंग में मौजूद होकर उन्होंने डेडियापाड़ा और सागबारा तालुका में खेती के लिए बोरवेल, पशुपालन के लिए गाय-भैंस, पीने के पानी की सुविधा, नई आंगनवाड़ी और स्कूल के कमरे बनाने और बच्चों में कुपोषण खत्म करने जैसी मांगें रखीं।

लेकिन विधानसभा में मिले जवाब और मंज़ूर कामों की लिस्ट के मुताबिक, उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी विकास ग्रांट से ज़्यादातर काम NGO, एजेंसियों और अधिकारियों के फ़ायदे को ध्यान में रखकर मंज़ूर किए गए। उन्होंने कहा कि जहाँ स्कूल नहीं हैं, वहाँ नए स्कूल बनाने के बजाय अपग्रेडेशन और रेनोवेशन के नाम पर ₹70-70 लाख खर्च दिखाए गए हैं। जहाँ आंगनवाड़ी नहीं हैं, वहाँ हर तालुका में रंग-रोगन के काम पर ₹50-50 लाख खर्च किए गए हैं। बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं, फिर भी इसे रोकने के लिए सही प्लानिंग नहीं की गई है।

रिपोर्टर - साबिर मेमन  

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