अखाड़ों में 'गद्दारी' और परंपराओं से खिलवाड़ पर भड़के डॉ. बिंदुजी महाराज
त्रंबकेश्वर : अखिल भारतीय खंड दर्शन अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधि डॉ. बिंदुजी महाराज जी ने वर्तमान समय में अखाड़ों के भीतर चल रही गतिविधियों और गुरु-शिष्य परंपरा के साथ हो रहे कथित खिलवाड़ पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने अखाड़ा प्रमुखों पर मर्यादा लांघने और राजनीतिक रसूख के चलते 'जगद्गुरु' व 'शंकराचार्य' जैसी सर्वोच्च उपाधियों के अवमूल्यन का गंभीर आरोप लगाया है।
"विनाश को आमंत्रण दे रहे हैं अखाड़ा प्रमुख"
डॉ. बिंदुजी महाराज जी ने कड़े शब्दों में कहा कि अखाड़ों के कुछ प्रमुखों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। उन्होंने सीधे तौर पर अखाड़ा परिषद के प्रमुख *रवींद्र पुरी, जूना पीठ के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि और निरंजनी पीठ के *कैलाशानंद* जैसे संतों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग अब तक मंडलेश्वर और महामंडलेश्वर जैसी उपाधियाँ बांट या बेच रहे थे, लेकिन अब वे शंकराचार्य पीठों की मर्यादा में अमर्यादित हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने इसे सनातन धर्म की नींव पर प्रहार बताते हुए इन पीठों के 'शोधन' की आवश्यकता पर बल दिया।
राजनीतिक झुकाव और फर्जी उपाधियों का खेल
जारी वक्तव्य में डॉ. बिंदुजी ने कुछ विशिष्ट उदाहरणों के साथ अपनी नाराजगी व्यक्त की:
प्रमोद कृष्णम का मुद्दा: उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रमोद कृष्णम कांग्रेस में थे, तब अखाड़ों ने उन्हें 'फर्जी बाबा' घोषित किया था, लेकिन भाजपा में आते ही उन्हें 'जगद्गुरु' की उपाधि से नवाज दिया गया। उन्होंने इसे धार्मिक पदों का राजनीतिकरण करार दिया।
शारदा पीठ और राजराजेश्वरम:* उन्होंने आरोप लगाया कि हरिद्वार के राजराजेश्वरम, जो कभी पाकिस्तान नहीं गए, स्वयं को जबरदस्ती पाकिस्तान स्थित शारदा पीठ का शंकराचार्य बता रहे हैं। साथ ही, अखाड़ा परिषद द्वारा उन्हें 'बद्रीनाथ पीठ' (जिस नाम से कोई आधिकारिक पीठ नहीं है) का शंकराचार्य घोषित करना परंपरा का अपमान है।
चक्रपाणि महाराज: डॉ. बिंदु जी ने चक्रपाणि नामक व्यक्ति को 'जगद्गुरु शंकराचार्य' घोषित किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई और इसे सनातन मर्यादा को कलंकित करने वाला कृत्य बताया।
देवभूमि की गरिमा पर प्रहार
डॉ. महाराज ने अत्यंत क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि देवभूमि हरिद्वार में अखाड़ों के संत अब 'गृहस्थों' को जगद्गुरु और शंकराचार्य बनाने के कुकृत्य में लिप्त हैं। यह न केवल उत्तराखंड की गरिमा को ठेस पहुँचा रहा है, बल्कि भावी पीढ़ी के सामने धर्म का गलत स्वरूप प्रस्तुत कर रहा है।
"अखाड़ों के भीतर बैठे कुछ गद्दार अपनी हदों को पार कर चुके हैं। गुरु-शिष्य परंपरा और शंकराचार्य जैसे पदों की गरिमा को बेचना अक्षम्य है। इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए।"
डॉ. बिंदुजी महाराज,(अखिल भारतीय खंड दर्शन अखाड़ा परिषद)
रिपोर्टर : लक्ष्मीकांत निकम

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