स्टीविया की खेती से किसानों को हो सकती है अच्छी कमाई
चीनी का प्राकृतिक विकल्प है स्टीविया: सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच स्टीविया की मांग बढ़ रही है। इसे मीठी तुलसी भी कहा जाता है। इसकी पत्तियों में ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनसे तैयार स्वीटनर सामान्य चीनी से करीब 200 से 300 गुना तक मीठा हो सकता है। स्टीविया के शुद्ध अर्क में कैलोरी नहीं होती, इसलिए इसका इस्तेमाल खाद्य और पेय पदार्थों में चीनी के विकल्प के रूप में किया जाता है। ऐसे में इसकी खेती किसानों के लिए कमाई का एक विकल्प बन सकती है।
एक बार रोपाई करके कई साल तक लें उपज:
स्टीविया एक बहुवर्षीय पौधा है, जिसे अनुकूल मौसम और उचित देखभाल मिलने पर कई वर्षों तक उगाया जा सकता है। आम तौर पर इसके खेत से 3 से 5 साल तक उत्पादन मिलने की संभावना बताई जाती है। हालांकि, पौधों की उम्र और उपज मिट्टी, जलवायु, सिंचाई, किस्म और देखभाल पर निर्भर करती है। इसकी खेती शुरू करने के लिए खेत की तैयारी, पौधों की खरीद, रोपाई, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करना पड़ता है। इसलिए निवेश से पहले स्थानीय स्तर पर लागत का आकलन करना जरूरी है।
साल में 3 से 4 बार हो सकती है कटाई:
अनुकूल परिस्थितियों में स्टीविया की पत्तियों की साल में कई बार कटाई की जा सकती है। कुछ खेती संबंधी जानकारियों के मुताबिक, एक फसल से 3 से 4 बार तक पत्तियां प्राप्त हो सकती हैं। कटाई के बाद पत्तियों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी होता है, ताकि उनकी गुणवत्ता और मिठास देने वाले तत्वों की मात्रा बनी रहे। पत्तियों की गुणवत्ता, नमी, सुखाने का तरीका और उनमें मौजूद प्राकृतिक मिठास देने वाले यौगिकों की मात्रा बाजार में मिलने वाले भाव को प्रभावित कर सकती है।
एक एकड़ से कितनी हो सकती है कमाई:
स्टीविया की खेती से किसानों की आमदनी का मुख्य स्रोत इसकी पत्तियां हैं। कुछ खेती संबंधी दावों में एक एकड़ से सालाना 1 लाख से 1.25 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई का अनुमान बताया जाता है। हालांकि, यह मुनाफा निश्चित नहीं है। वास्तविक कमाई फसल की उपज, पत्तियों के बाजार भाव, मजदूरी, खाद, सिंचाई, कटाई और सुखाने के खर्च पर निर्भर करती है। इसलिए खेती शुरू करने से पहले संभावित खरीदारों से कीमत और खरीद की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है।
खेती से पहले बाजार की मांग जरूर जांचें:
स्टीविया की पत्तियों का इस्तेमाल प्राकृतिक स्वीटनर बनाने वाली कंपनियों, खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माताओं और कुछ हर्बल उत्पादों से जुड़ी इकाइयों में हो सकता है। लेकिन किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि वे खेती शुरू करने से पहले अपने इलाके में खरीदारों की उपलब्धता, गुणवत्ता के मानक और नियमित खरीद की संभावनाओं की पुष्टि करें। बड़े स्तर पर निवेश करने के बजाय शुरुआत में छोटे क्षेत्र में खेती करना और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। इससे लागत और बाजार से जुड़े जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

No Previous Comments found.