राजस्व निरीक्षक बने अधिकारी, सिकुड़ती जा रहीं पवई की गलियां
पवई : पवई नगर में अव्यवस्थित निर्माण और सिकुड़ती जा रही गलियों का मुद्दा अब नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शहर की गलियों में अतिक्रमण और निर्माण संबंधी नियमों के पालन को लेकर यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आम नागरिकों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। सवाल यह है कि नगर की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर है, आखिर वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किस तरह कर रहे हैं?
नगर में गलियों की चौड़ाई और अतिक्रमण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नगर परिषद की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है। आरोप हैं कि नगरहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही, जबकि योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य कार्यों में रुचि को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना भी जरूरी है।
प्रथम नागरिक के आदेशों का कितना हो रहा पालन?
नगर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और आम नागरिकों को राहत दिलाने के लिए प्रथम नागरिक नगर परिषद अध्यक्ष बसंत दहायत की ओर से दिए गए आदेशों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। आखिर आदेश जारी होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रहती है, तो फिर प्रशासनिक व्यवस्था का औचित्य क्या रह जाता है?
राजस्व निरीक्षक की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
नगर की भूमि, सीमांकन और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में राजस्व अमले की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पवई की गलियों के लगातार संकरा होने और निर्माण संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है लेकिन यहां पदस्थ राजस्व निरीक्षक की नजर केवल मलाईदार फाइलों पर रहती है आज तक नगर में जाकर इन्होंने नगर की स्थिति का जायजा नहीं लिया होगा नगरवासियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब समस्याएं सामने हैं, तो उनके निराकरण के लिए ठोस कार्रवाई कब होगी?
विकास के नाम पर शहर की मूलभूत व्यवस्था से समझौता क्यों?
नगर परिषद का दायित्व केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि शहर की सड़कों, गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थलों को व्यवस्थित रखना भी है। यदि नगर की गलियां ही संकरी होती चली जाएं और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़े, तो विकास के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना लाजिमी है
पवई जैसे नगर में गलियों की उपलब्ध चौड़ाई, अतिक्रमण की स्थिति और निर्माण नियमों के पालन की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी नागरिक के साथ अन्याय न हो और नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से हो।
क्या नगर परिषद अपनी जिम्मेदारी निभाएगी?
पवई नगर की समस्याओं को लेकर उठती आवाजें अब नगर परिषद के सामने जवाबदेही का सवाल खड़ा कर रही हैं। नगरवासियों को यह जानने का अधिकार है कि गलियों की स्थिति सुधारने, अतिक्रमण पर नियंत्रण करने और प्रथम नागरिक के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर परिषद पवई शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए ठोस कार्रवाई करेगी, या फिर संकरी होती गलियां और बदहाल व्यवस्थाएं यूं ही शहर की पहचान बनती रहेंगी? अब आवश्यकता आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की है, ताकि पवई के नागरिकों को बेहतर और सुव्यवस्थित नगर की सुविधा मिल सके।
संवाददाता : सुरेश संगम द्विवेदी

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