प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार ने सनातनी समाज को झकझोर दिया है। आरोप है कि शिष्यों की शिखा तक खींची गई। क्या सनातन सिर्फ भाषणों में सुरक्षित है, या ज़मीन पर उसका सम्मान अब भी ज़िंदा है?
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