कुसुमाग्रज जयंती पर जेजुरी के जिजामाता विद्यालय में मनाया गया मराठी भाषा दिवस
पुरंदर (पुणे) : जेजुरी स्थित जिजामाता विद्यालय में 27 फरवरी को मराठी भाषा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित महान कवि, साहित्यकार एवं विचारक विष्णु वामन शिरवाडकर, जिन्हें साहित्य जगत में कुसुमाग्रज के नाम से जाना जाता है, इनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों ने मराठी भाषा के गौरव और समृद्ध परंपरा को स्मरण किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक मुख्याध्यापक संघ के सचिव एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्राचार्य नंदकुमार सागर ने अपने संबोधन में कहा कि कुसुमाग्रज ने अपने साहित्यिक लेखन के माध्यम से मराठी भाषा को वैचारिक शक्ति, सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों की ऊँचाई प्रदान की। उन्होंने कविता, नाटक, कहानी और निबंध सहित विभिन्न साहित्य विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके लेखन में “मराठी मानव का आत्मा ही मराठी भाषा है” यह भावना निरंतर प्रकट होती है।
प्राचार्य सागर ने आगे कहा कि कुसुमाग्रज का साहित्य आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है तथा मराठी भाषा के गौरव को बढ़ाने में उनका योगदान अमूल्य है। उन्होंने सभी से मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
इस अवसर पर केंद्र प्रमुख सुरेखा कामथे, मुख्याध्यापक अशोक चव्हाण, जेजुरी देवस्थान के पूर्व विश्वस्त नितीन राऊत, पर्यवेक्षक बालासाहेब जगताप, पोपट राणे, निर्मला निगडे, राजेंद्र ताम्हाणे, कुलदीप साळवी, जितेंद्र कोकणे, अजय जगताप सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन मराठी भाषा के संवर्धन के संकल्प के साथ किया गया।
रिपोर्टर : संतोष
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