APMC के 1% यूज़र चार्ज का व्यापारियों ने किया विरोध, महंगाई बढ़ने की जताई आशंका
पुणे - पूना मर्चेंट्स चैंबर ने पुणे कृषि उपज बाजार समिति (APMC) द्वारा अनियमित कृषि उपज,गैर-कृषि वस्तुओं और संबंधित उत्पादों के लेन-देन पर 1 प्रतिशत यूज़र चार्ज लगाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। चैंबर का कहना है कि इस कदम से महंगाई और बढ़ेगी तथा उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। चैंबर के अध्यक्ष राजेंद्र बाठिया ने कहा कि यह निर्णय सीधे तौर पर आम नागरिकों को प्रभावित करेगा,जो पहले से ही बढ़ती ईंधन कीमतों, परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं के महंगे दामों से जूझ रहे हैं। बाठिया के अनुसार,अतिरिक्त यूज़र चार्ज के कारण दाल,चीनी,खाद्य तेल,रवा (सूजी), गेहूं का आटा और मैदा जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। उनका दावा है कि इस शुल्क से दालों के दाम लगभग 150 रुपये प्रति क्विंटल, चीनी के 50 रुपये प्रति क्विंटल,आटा उत्पादों के 40 रुपये प्रति क्विंटल तथा खाद्य तेल के लगभग 30 रुपये प्रति डिब्बा तक बढ़ सकते हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
चैंबर ने तर्क दिया कि बाजार समिति वित्तीय रूप से सक्षम है और केवल राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं है। बाठिया ने आरोप लगाया कि वर्षों से आय व्यय से अधिक होने के बावजूद APMC बाजार से जुड़े हितधारकों को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है। उन्होंने बाजार परिसर में सड़कों,स्वच्छता,पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। हालांकि,बाजार समिति का कहना है कि इस यूज़र चार्ज से प्रतिवर्ष अतिरिक्त 10 से 15 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग बाजार की आधारभूत संरचना,स्वच्छता और समग्र प्रबंधन में सुधार के लिए किया जाएगा। चैंबर का दावा है कि इस शुल्क का उल्टा असर भी हो सकता है। बाजार परिसर में कीमतें बढ़ने से उपभोक्ता उन स्थानों से खरीदारी करना पसंद कर सकते हैं जहां ऐसा कोई शुल्क लागू नहीं है। इससे APMC के भीतर व्यापारिक गतिविधियां घट सकती हैं और राजस्व बढ़ने के बजाय कम हो सकता है।
चैंबर ने यह भी चेतावनी दी कि व्यापार में कमी का असर व्यापारियों, किसानों,हमालों,मजदूरों,परिवहन संचालकों और बाजार व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि अंततः इस निर्णय का सबसे अधिक बोझ आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा और महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।
संवादाता - यश सोलंकी
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