कात्रज डेयरी में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के आदेश, सरकार ने गठित की दो सदस्यीय समिति
पुणे - महाराष्ट्र सरकार ने पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ, जिसे आमतौर पर कात्रज डेयरी के नाम से जाना जाता है, में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं। शिकायतों में संदिग्ध दूध खरीद आंकड़े, नियमों के उल्लंघन के साथ सदस्यता वितरण, बढ़ती वित्तीय देनदारियां तथा एक धार्मिक कार्यक्रम के लिए लगभग 3,000 लीटर दूध मुफ्त वितरित किए जाने के आरोप शामिल हैं। डेयरी विकास विभाग को प्राप्त शिकायतों के आधार पर पुणे विभागीय उपनिबंधक सहकारी संस्थाएं (डेयरी) ने 11 जून को दो सदस्यीय जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया।
इस समिति की अध्यक्षता सहायक निबंधक सहकारी संस्थाएं (डेयरी) श्रीकांत श्रीखंडे करेंगे, जबकि जिला विशेष लेखा परीक्षक (कक्षा-2) अनंत चिंधु आढारी सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। समिति को डेयरी के कार्यों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या दूध खरीद गैर-मौजूद या निष्क्रिय दुग्ध सहकारी संस्थाओं के नाम पर दिखाई गई थी, क्या दूध परिवहन खर्च में अनियमितताएं हुईं और क्या सदस्यता प्रदान करते समय सहकारी उपविधियों का उल्लंघन किया गया। समिति डेयरी की बढ़ती वित्तीय देनदारियों के कारणों की भी जांच करेगी। विशेष रूप से उन आरोपों की जांच होगी जिनमें कहा गया है कि एक धार्मिक कार्यक्रम के लिए लगभग 3,000 लीटर दूध मुफ्त वितरित किया गया था। जांचकर्ता यह सत्यापित करेंगे कि इसके लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं, निदेशक मंडल ने आवश्यक प्रस्ताव पारित किए थे या नहीं तथा व्यय निर्धारित वित्तीय अधिकारों के भीतर किया गया था या नहीं। शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि संदिग्ध सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दूध खरीद दिखाकर वित्तीय लेन-देन किए गए। समिति यह जांच करेगी कि इन संस्थाओं से वास्तव में दूध संग्रह किया गया था या केवल कागजी रिकॉर्ड तैयार किए गए थे।यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब यह सहकारी संस्था राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति में है। लंबे समय से इस पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का प्रभाव माना जाता रहा है। पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की तरह कात्रज डेयरी भी क्षेत्र के सहकारी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती है। वरिष्ठ एनसीपी नेता अजित पवार के निधन के बाद डेयरी के मामलों की जिम्मेदारी बढ़ते हुए एनसीपी सांसद और उनके पुत्र पार्थ पवार से जोड़ी जा रही थी। हाल ही में पार्थ पवार की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष स्वप्निल धामधेरे ने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद अरुण चांभारे को 12 जून को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। गौरतलब है कि चांभारे के पदभार संभालने के 24 घंटे के भीतर ही जांच के आदेश जारी कर दिए गए, जिससे नई नेतृत्व टीम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह जांच जुन्नर तालुका के नारायणगांव निवासी वरुण जयसिंह भुजबल द्वारा 2 जून को महाराष्ट्र के डेयरी विकास मंत्री अतुल सावे को दी गई शिकायत के बाद शुरू हुई। मंत्री ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जांच के तहत समिति दूध संग्रह केंद्रों का भौतिक सत्यापन करेगी, दूध उत्पादकों और सदस्य संस्थाओं के रिकॉर्ड की जांच करेगी, परिवहन और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करेगी तथा बैंक खातों, दूध बिलों और डिजिटल रिकॉर्ड का निरीक्षण करेगी। यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो संबंधित संस्थाओं का पंजीकरण रद्द करने जैसी कार्रवाई की भी सिफारिश की जा सकती है। जांच के निष्कर्ष पुणे जिले की सबसे प्रभावशाली सहकारी संस्थाओं में से एक पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं और सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता एवं सुशासन को लेकर नई बहस को जन्म दे सकते हैं।
संवादाता - यश सोलंकी
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