दौंड को बारामती प्रशासनिक क्षेत्र में शामिल करना जनता के साथ अन्याय : योगेश कटारिया

दौंड - बारामती में प्रस्तावित अपर जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में दौंड तहसील को शामिल किए जाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव का दौंड नगर परिषद के नागरिक हित संरक्षण मंडल,भाजपा,आरपीआई तथा पीआरपी विकास आघाड़ी के गटनेता योगेश कटारिया ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस निर्णय को दौंड तहसील के नागरिकों के साथ अन्याय बताते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में औपचारिक आपत्ति एवं सुझाव पत्र प्रस्तुत किया है। कटारिया ने विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा नगरसेवकों की ओर से दाखिल आपत्ति पत्र में कहा है कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को प्रशासनिक सेवाएं सरल एवं सुलभ रूप से उपलब्ध कराना होना चाहिए। लेकिन दौंड तहसील को बारामती के अधिकार क्षेत्र में शामिल करने से नागरिकों को भौगोलिक, आर्थिक तथा आवागमन की दृष्टि से गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि दौंड राज्य का एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है और यहां के अधिकांश नागरिकों की शिक्षा, रोजगार, व्यापार तथा प्रशासनिक कार्य पुणे से जुड़े हुए हैं। रेल संपर्क के कारण पुणे तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक है, इसलिए दौंड तहसील को पुणे कलेक्टर कार्यालय से ही संबद्ध रखा जाना चाहिए। कटारिया ने यह भी कहा कि राहू, पिंपलगांव बेट सहित पुणे मार्ग से जुड़े लगभग 40 गांवों का वर्षों से पुणे शहर के साथ सीधा संपर्क रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों के लोगों के लिए प्रशासनिक कार्यों हेतु बारामती जाना समय और आर्थिक दृष्टि से अधिक कठिन होगा। उन्होंने बताया कि रेलवे कर्मचारी,राज्य रिजर्व पुलिस बल,पुलिस प्रशिक्षण केंद्र तथा अन्य कई सरकारी विभागों का प्रशासनिक समन्वय भी पुणे से है। यदि दौंड को बारामती के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया तो नागरिकों को विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए पुणे और बारामती दोनों स्थानों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। कटारिया ने आरोप लगाया कि दौंड का बारामती प्रशासनिक क्षेत्र में समावेश राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुणे से दौंड का ऐतिहासिक, सामाजिक और भावनात्मक संबंध रहा है तथा इस निर्णय से नागरिकों में व्यापक असंतोष पैदा होगा। यदि सरकार ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार नहीं किया तो भविष्य में जनआंदोलन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने मांग की कि दौंड तहसील को पूर्ववत पुणे कलेक्टर कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में ही रखा जाए। यदि प्रशासनिक सुविधा के लिए नया अपर जिलाधिकारी कार्यालय स्थापित करना आवश्यक हो,तो उसे बारामती के बजाय दौंड में स्थापित किया जाए। इस संबंध में प्रस्तुत आपत्ति एवं सुझाव पत्र पर नागरिक हित संरक्षण मंडल,भाजपा, आरपीआई तथा पीआरपी विकास आघाड़ी के सभी नगरसेवकों ने हस्ताक्षर कर इस मांग का समर्थन किया है।

रिपोर्टर - प्रमोद 

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