निजी वाहनों पर ‘महाराष्ट्र पुलिस’ लिखने वालों की जांच की मांग

दौंड : दौंड तहसील में कुछ निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर ‘महाराष्ट्र पुलिस’, ‘POLICE’ अथवा पुलिस विभाग की आधिकारिक पहचान दर्शाने वाले शब्द, स्टिकर और चिह्न लगाकर वाहन चलाए जाने का दावा किया गया है। ऐसे वाहनों की विशेष जांच कर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमर मधुकर जोगदंड ने की है।

जोगदंड ने जारी बयान में कहा है कि निजी वाहनों पर पुलिस विभाग की पहचान दर्शाने वाले शब्द या चिह्न लगाने के लिए संबंधित वाहन मालिक को आधिकारिक अनुमति है या नहीं, इसकी प्रशासन द्वारा जांच की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित वाहन पुलिस विभाग के आधिकारिक उपयोग के लिए अधिकृत है अथवा पूरी तरह निजी उपयोग का है, इसकी पुष्टि भी वाहन के दस्तावेजों के आधार पर की जाए।
निजी वाहन पर ‘POLICE’ या ‘महाराष्ट्र पुलिस’ लिखा होने से आम नागरिकों में यह भ्रम पैदा हो सकता है कि वाहन में सवार व्यक्ति पुलिस अधिकारी या कर्मचारी है। इसलिए इस मामले को केवल यातायात नियमों तक सीमित न रखते हुए परिस्थितियों के अनुसार अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत भी जांच की जानी चाहिए, ऐसी मांग उन्होंने की है।
वाहन नंबर सहित रिकॉर्ड रखने की मांग
जोगदंड ने मांग की है कि दौंड तहसील में ऐसे वाहनों की विशेष जांच कर उनके वाहन नंबर सहित रिकॉर्ड तैयार किए जाएं। संबंधित वाहन की आरसी, मालिकाना हक, वाहन का वास्तविक उपयोग और पुलिस पहचान दर्शाने के लिए किसी प्रकार की आधिकारिक अनुमति है या नहीं, इसकी जांच की जाए।
यदि वाहन मालिक स्वयं पुलिस अधिकारी या कर्मचारी है, तो उसके निजी वाहन पर ‘POLICE’ या ‘महाराष्ट्र पुलिस’ लिखने अथवा विभागीय पहचान का चिह्न लगाने की अनुमति विभागीय नियमों के अनुसार है या नहीं, इसकी भी अलग से जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि इस बात की पड़ताल की जाए कि कहीं ‘POLICE’ अथवा ‘महाराष्ट्र पुलिस’ लिखे होने का उपयोग करके किसी व्यक्ति ने स्वयं को पुलिसकर्मी बताने, यातायात नियमों में अनुचित छूट हासिल करने अथवा आम नागरिकों पर प्रभाव या दबाव बनाने का प्रयास तो नहीं किया। जांच में ऐसी पहचान का किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए दुरुपयोग सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लागू कानून के अनुसार अलग से कार्रवाई की जाए।
‘कानून सभी के लिए समान होना चाहिए’
जोगदंड ने कहा कि सामान्य नागरिक द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन किए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है। इसी प्रकार पुलिस विभाग से संबंधित किसी व्यक्ति का वाहन निजी है तो उस पर भी नियमों को समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी वाहन को ‘महाराष्ट्र पुलिस’, ‘POLICE’ अथवा संबंधित चिह्न लगाने की आधिकारिक अनुमति है, तो प्रशासन को दस्तावेजों के आधार पर यह स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति पर अनावश्यक या गलत आरोप न लगे।
जोगदंड ने दौंड पुलिस प्रशासन, उपविभागीय पुलिस अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और यातायात विभाग से संयुक्त रूप से विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है। अभियान के बाद कितने वाहनों की जांच हुई, कितने वाहनों पर कार्रवाई की गई तथा कितने वाहनों को ऐसी पहचान के इस्तेमाल की आधिकारिक अनुमति प्राप्त है, इसकी जानकारी भी प्रशासन द्वारा सार्वजनिक की जानी चाहिए।
“कानून के सामने सभी समान हैं। निजी वाहनों पर ‘महाराष्ट्र पुलिस’ या ‘POLICE’ लिखने की आधिकारिक अनुमति है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जाए।”
— अमर मधुकर जोगदंड, आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता

रिपोर्टर : प्रमोद दत्तात्रय काकडे

 

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