प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने पत्रकार ब्लैक डे मनाया

रायपुर :  प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने जनसंपर्क विभाग के संचालक आशीष टिकरिया को सौंपा ज्ञापन, घटना की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग । एक साल बाद भी न्याय का इंतजार! 9 अक्टूबर की घटना पर कार्रवाई नहीं होने से प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन पत्रकारों ने मनाया ब्लैक डे रायपुर, छत्तीसगढ़। 9 अक्टूबर 2025 को हुई घटना के एक वर्ष पूरे होने के बाद भी न्याय और कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे पत्रकारों ने प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ इकाई के नेतृत्व में ब्लैक डे मनाया। संगठन के पदाधिकारियों ने काले कपड़े पहनकर घटना के प्रति विरोध दर्ज कराया और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर जनसंपर्क विभाग के संचालक आशीष टिकरिया को ज्ञापन सौंपा। संगठन का आरोप है कि घटना को एक वर्ष बीत जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। वहीं, जनसंपर्क विभाग द्वारा भी मामले की स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई। पत्रकारों का कहना है कि घटना के संबंध में मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, राज्यपाल और जनसंपर्क विभाग के सचिव सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। मुख्यमंत्री और मंत्रियों से भी लगाई गुहार, नहीं मिला ठोस आश्वासन प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि पत्रकारों ने इस मामले को शासन के विभिन्न स्तरों तक पहुंचाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय मंत्रियों से न्याय की अपेक्षा की गई, लेकिन संगठन के अनुसार, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें ऐसा कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, जिससे मामले में कार्रवाई की उम्मीद दिखाई देती। संगठन ने सवाल उठाया कि यदि पत्रकारों के साथ हुई किसी गंभीर घटना के मामले में एक वर्ष तक निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो पत्रकार सुरक्षा, उनके सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ब्लैक डे के कार्यक्रम के दौरान संगठन ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारी संजीव तिवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि पत्रकारों को अपना ज्ञापन सौंपने के लिए जनसंपर्क कार्यालय पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से संगठन के सदस्यों को परेशान किया गया तथा उन्हें थाने में रोकने का प्रयास किया गया, ताकि वे जनसंपर्क कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज न करा सकें।
संगठन के अनुसार, तमाम बाधाओं के बावजूद पदाधिकारियों ने अपना प्रयास जारी रखा। अंततः पुलिस प्रशासन की ओर से संगठन के पदाधिकारियों को पुलिस बल उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद वे जनसंपर्क विभाग के संचालक आशीष टिकरिया को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। संगठन ने इस पूरे घटनाक्रम को पत्रकारों की आवाज दबाने के प्रयास के रूप में देखा और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी संगठन को अपनी मांग रखने तथा संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपने का अधिकार है।
प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने मांग की है कि 9 अक्टूबर 2025 की घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में घटना से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया जाए तथा यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि ब्लैक डे मनाने का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन को यह याद दिलाना भी है कि घटना के एक वर्ष बाद भी न्याय की मांग समाप्त नहीं हुई है। पत्रकारों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी, एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि पत्रकारों के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी हितों की रक्षा तथा उनके सम्मान से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहेगा। संगठन के अनुसार, जब तक 9 अक्टूबर 2025 की घटना की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक इस मामले को सार्वजनिक मंचों पर उठाने का प्रयास जारी रहेगा। अब देखना होगा कि जनसंपर्क विभाग, पुलिस प्रशासन और राज्य शासन इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाते हैं और पत्रकारों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब कब तक मिलता है।

रिपोर्टर : मज़हर इकबाल 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.