पत्रकारों का गुस्सा फूटा, संजीव तिवारी को बर्खास्त करने की मांग

रायपुर : जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक संजीव तिवारी की लंबे समय से पदस्थापना, कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, शासकीय विज्ञापनों के आवंटन, टेंडर प्रक्रिया तथा पूर्व में सामने आई घटनाओं को लेकर प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की छत्तीसगढ़ इकाई ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। संगठन का कहना है कि इन विषयों को लेकर पूर्व में भी लगातार कई बार संबंधित अधिकारियों एवं शासन के समक्ष ज्ञापन और शिकायतें प्रस्तुत की जा चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई एवं जांच की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। इसी क्रम में एसोसिएशन ने 22 अक्टूबर 2026 को जनसंपर्क संचालनालय, नवा रायपुर में विस्तृत ज्ञापन सौंपकर सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच की कार्रवाई का ATR (Action Taken Report) 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक करने की मांग की है। जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक संजीव तिवारी की लंबे समय से पदस्थापना, कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, शासकीय विज्ञापनों के आवंटन, टेंडर प्रक्रिया तथा पूर्व में सामने आई घटनाओं को लेकर प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की छत्तीसगढ़ इकाई ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। संगठन का कहना है कि इन विषयों को लेकर पूर्व में भी लगातार कई बार संबंधित अधिकारियों एवं शासन के समक्ष ज्ञापन और शिकायतें प्रस्तुत की जा चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई एवं जांच की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। इसी क्रम में एसोसिएशन ने 22 अक्टूबर 2026 को जनसंपर्क संचालनालय, नवा रायपुर में विस्तृत ज्ञापन सौंपकर सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच की कार्रवाई का ATR (Action Taken Report) 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मिश्रा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जनसंपर्क संचालनालय पहुंचा। ज्ञापन जनसंपर्क संचालनालय के प्रशासनिक स्थापना के अधिकारी द्वारा प्राप्त किया गया। संगठन ने कहा कि लंबे समय से उठाए जा रहे इन मामलों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी ठहराना नहीं, बल्कि शिकायतों में उठाए गए तथ्यों और दस्तावेजों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना है। एसोसिएशन द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि जनसंपर्क विभाग में संजीव तिवारी की लगभग 30 वर्षों से अधिक समय से पदस्थापना के संबंध में प्रशासनिक प्रक्रिया, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। संगठन ने उनकी प्रथम नियुक्ति से लेकर वर्तमान पदस्थापना तक के दस्तावेजों की जांच की मांग की है। ज्ञापन में प्रथम नियुक्ति पत्र, नियुक्ति आदेश, संपूर्ण सेवा अभिलेख, पदस्थापना एवं स्थानांतरण संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने के साथ-साथ उनके द्वारा प्रस्तुत वार्षिक आय घोषणा पत्र और चल-अचल संपत्ति के विवरण की भी नियमानुसार जांच कराने की मांग रखी गई है। एसोसिएशन का कहना है कि एक ही विभाग में लंबे समय तक पदस्थापना के दौरान लागू प्रशासनिक नियमों एवं स्थानांतरण नीति का पालन हुआ है अथवा नहीं, इसकी भी जांच आवश्यक है। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी गई है। एसोसिएशन ने अपर संचालक संजीव तिवारी को जांच पूरी होने तक वर्तमान पद से तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि जिस अधिकारी के कार्यकाल और पदस्थापना से जुड़े मामलों की जांच की मांग की जा रही है, उनके वर्तमान पद पर बने रहने की स्थिति में जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए जांच के दौरान उन्हें वर्तमान दायित्व से अलग रखने की मांग की गई है। ज्ञापन में 9 अक्टूबर 2025 को हुई घटना को भी प्रमुखता से उठाया गया है। एसोसिएशन ने इस घटना से संबंधित दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं संबंधित व्यक्तियों के बयानों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाकर यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि उस मामले में किसकी क्या भूमिका थी और यदि जांच में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व की इस घटना को लेकर संगठन द्वारा पहले भी संबंधित स्तर पर विषय उठाया गया था और कार्रवाई की मांग की जाती रही है। अब संगठन चाहता है कि मामले को केवल पत्राचार तक सीमित न रखते हुए दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक जांच की जाए। एसोसिएशन के अनुसार संजीव तिवारी की पदस्थापना, विभागीय कार्यप्रणाली, विज्ञापन आवंटन तथा अन्य संबंधित विषयों को लेकर पूर्व में भी लगातार कई बार ज्ञापन एवं शिकायतें प्रस्तुत की जा चुकी हैं। संगठन का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद यदि शिकायतों पर की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती है, तो इससे शिकायतकर्ताओं के बीच प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर असंतोष पैदा होता है। इसी वजह से इस बार संगठन ने केवल जांच की मांग करने के बजाय शिकायत पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन सार्वजनिक करने की स्पष्ट मांग रखी है। संगठन ने कहा है कि पूर्व में दिए गए ज्ञापनों और शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई, किस अधिकारी को जांच सौंपी गई, जांच किस स्तर तक पहुंची और यदि कार्रवाई लंबित है तो उसका कारण क्या है, इन सभी बिंदुओं की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

ज्ञापन में जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी किए गए शासकीय विज्ञापनों, विज्ञापन आवंटन प्रक्रिया, निविदाओं यानी टेंडर, भुगतान तथा संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग भी की गई है। एसोसिएशन ने मांग की है कि अपर संचालक संजीव तिवारी के कार्यकाल में पिछले दो वर्षों के दौरान जारी किए गए शासकीय विज्ञापनों एवं टेंडर संबंधी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। इसमें विज्ञापन किस आधार पर आवंटित किए गए, संबंधित नियमों का पालन हुआ या नहीं, भुगतान की प्रक्रिया क्या रही और संबंधित वित्तीय लेन-देन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया अथवा नहीं, इसकी जांच की जाए। संगठन ने कहा है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, पक्षपात अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

एसोसिएशन की सबसे महत्वपूर्ण मांग 15 दिनों के भीतर ATR सार्वजनिक करने की है, शिकायत प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर जांच एवं कार्रवाई का प्रतिवेदन यानी Action Taken Report सार्वजनिक किया जाए। संगठन ने यह भी कहा है कि यदि निर्धारित 15 दिनों में पूरी जांच करना संभव नहीं है तो कम से कम प्रारंभिक कार्रवाई, जांच की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्रवाई पूरी करने की समय-सीमा का उल्लेख करते हुए अंतरिम ATR सार्वजनिक किया जाए।

एसोसिएशन ने मांग की है कि ATR जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक वेबसाइट अथवा किसी अन्य उपयुक्त सार्वजनिक माध्यम पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिकायतकर्ता सहित आम नागरिक भी कार्रवाई की स्थिति से अवगत हो सकें। संगठन का कहना है कि लगातार ज्ञापन दिए जाने के बावजूद केवल औपचारिक जवाब अथवा शिकायत से अलग विषय पर जवाब देना समस्या का समाधान नहीं है। शिकायत में जिन बिंदुओं को उठाया गया है, उन्हीं बिंदुओं पर जांच कर स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। एसोसिएशन ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि संजीव तिवारी की नियुक्ति एवं सेवा अभिलेखों की जांच की स्थिति क्या है, चल-अचल संपत्ति और आय घोषणा पत्रों की जांच हुई अथवा नहीं, 9 अक्टूबर 2025 की घटना की जांच कहां तक पहुंची तथा पिछले दो वर्षों के शासकीय विज्ञापनों और टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा में क्या तथ्य सामने आए।
एसोसिएशन ने कहा कि शासकीय विज्ञापनों में जनता के धन का उपयोग होता है। इसलिए विज्ञापन आवंटन, भुगतान और उससे संबंधित प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बेहद जरूरी है। संगठन का कहना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप गलत हैं तो निष्पक्ष जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए । एसोसिएशन ने शासन एवं जनसंपर्क विभाग से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध जांच कराने और जांच की प्रगति सार्वजनिक करने की मांग की है। 22 अक्टूबर 2026 को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मिश्रा ने किया। ज्ञापन जनसंपर्क संचालनालय के प्रशासनिक स्थापना के अधिकारी द्वारा प्राप्त किया गया। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, संगीता बर्मन, आनंद गुप्ता, संदीप शर्मा, आयुष, मयंक श्रीवास्तव, सरस बर्मन, पीके, मोनिका लॉरेंस, सुमन, लोकेश हिरवानी, भूखान नारंग, संतोष कुमार यदु, सचिन यादव, अभिषेक कुमार, प्रदीप पाठकर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए संगठन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। एसोसिएशन ने दोहराया कि यह मामला केवल एक ज्ञापन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व में भी कई बार संबंधित विषयों को शासन एवं विभाग के समक्ष उठाया जा चुका है। संगठन अब चाहता है कि पूर्व में दिए गए सभी ज्ञापनों एवं शिकायतों को एक साथ संज्ञान में लेकर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए तथा नियमानुसार कार्रवाई का लिखित एवं सार्वजनिक प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए।

रिपोर्टर : मजहर इकबाल 

 

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