सीएम रेखा गुप्ता को मिला खास मौका , क्या बन पाएंगी धांसू मुख्यमंत्री ?
दिल्ली की सियासत में एक बार फिर महिला नेतृत्व की बयार चल पड़ी है... बीजेपी ने दूसरी बार दिल्ली की सत्ता पर कब्जा किया है, और इस बार मुख्यमंत्री के तौर पर रेखा गुप्ता को चुना गया है... और उनकी ताजपोशी की गई ... लेकिन ये दिल्ली का वो पल है, जब बीजेपी ने एक बार फिर दिखा दिया कि ‘महिला नेतृत्व’ को पार्टी के एजेंडे का अहम हिस्सा बनाया है... लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि आखिर इससे बीजेपी को कोई फायदा होगा या नहीं .... क्या एक महिला मुख्यमंत्री दिल्ली में वो कमाल कर पाएगी .. जो बाकी राज्यों में कुछ मुख्यमंत्री कर कर रहें है ..
दिल्ली की सत्ता को वो दौर याद करते है जब दिल्ली पर महिला मुख्यमंत्रियों का कब्जा था .. एक समय पर शीला दीक्षित का दिल्ली पर राज था .... वो उन दिनों हाईलाइट रहने वाली मुख्यमंत्री के तौर पर जानी जाती थी....हांलांकि बीजेपी से शीला दीक्षित का कोई नाता नहीं था ...लेकिन उन्होनें दिल्ली पर लंबे समय के लिए राज किया ...इसके अलावा अगर बात करें 1998 में सुषमा स्वराज की तो , सिर्फ 52 दिन में उन्हें खुद को साबित करना पड़ा था। इस दौरान बीजेपी के लिए ढेर सारी समस्याएं थीं—प्याज की महंगाई, चुनावी दवाब, और अंदरूनी पार्टी संघर्ष... अंत में चुनाव में हार के बाद सुषमा को इस्तीफा देना पड़ा.... वही स्थिति आतिशी की थी, जो ‘एक्सीडेंटल’ मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन उनका कार्यकाल भी बहुत छोटा था ....मगर अब बारी है रेखा गुप्ता की ....जिनके बाद शीला दीक्षित की तरह ही भरपूर मौका है .... सीएम रेखा गुप्ता के पास वो मौका है, जो न सुषमा को मिला था, न आतिशी को। उनके पास पूरा पांच साल का कार्यकाल है, और वो पार्टी के साथ मिलकर दिल्ली की सियासत में स्थिरता और विकास लाने का एक ऐतिहासिक अवसर पकड़ सकती हैं

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