राम मंदिर आंदोलन का बीजेपी को कब मिलेगा ‘रिटर्न गिफ्ट’ .. |

अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन को एक साल हो गये. ‘राम आएंगे...’इस बार का सभी को विश्वास था और राम आ भी गये. श्री राम के आने के साल भर बीत भी गये.अयोध्या आंदोलन के सहारे ही बीजेपी केंद्र की सत्ता तक दोबारा पहुंची, और फिलहाल यूपी की सत्ता पर भी काबिज है. लेकिन सवाल एक आज भी पूछा जा रहा है कि राम मंदिर के रूप में हिंदुओं को तो अपनी आस्‍था का नया तीर्थ मिल गया, लेकिन बीजेपी को...क्या मिला .... बीजेपी ने राम मंदिर आंदोलन को धार दी ...इस बात में कोई शक नहीं ...इसका श्रेय वो भी खुद को ही देती है ...इसका प्रमाण है कि बीजेपी ने आज एक्स अकाउंट पर एक वीडियो भी शेयर की ..और राम मंदिर को लेकर अपने योगदान और ऐतिहासिक पल को भी याद किया ..

यह तो मानना पड़ेगा कि राम मंदिर ने बीजेपी को अपने राजनीतिक अभियान के लिए सुनहरे मौके दिए, और मंदिर आंदोलन को बीजेपी ने अपने चुनावी सफर का रास्ता बना लिया। लेकिन क्या यह राह इतनी आसान थी? और क्या बीजेपी ने इस सच्चाई से कुछ सिखा, जो अभी तक परिणामों में छिपी है?

जब राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, तो बीजेपी ने इसे अपने लिए एक चुनावी कार्ड के रूप में इस्तेमाल किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा दिया, लेकिन नतीजे चौंकाने वाले थे। बीजेपी ना तो 400 सीटें छू पाई और ना ही अपने बहुमत को बनाए रख पाई। यूपी में तो बीजेपी अपने पिछले चुनावों से आधी सीटों पर सिमट कर रह गई, और फैजाबाद (अयोध्या) सीट भी हार गई। राम मंदिर के बाद बीजेपी के हाथ से ‘वोट बैंक’ भी फिसल गया?

वहीं अब मिल्कीपुर उपचुनाव, जहां बीजेपी का भविष्य दांव पर है,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच कड़ी टक्कर ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बीजेपी इस प्रतिष्ठा युद्ध में जीत पाएगी?

इतना ही नहीं ,राम मंदिर उद्घाटन के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान आग में घी डालने जैसा था। कई बार ऐसे मौके आए , जब उन्होंने ही हिंदूवादी नेताओं पर सवाल उठा दिया ..और कह दिया कि कुछ लोग जो मंदिर मस्जिद करते रहते है वो अपने आप को हिंदूवादी नेता ना माने ..ये निशाना सीधे तौर पर सीएम योगी पर माना गया .. 

कुल मिलाकर देखा जाए तो . अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन, जो धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक कदम था, अब बीजेपी के लिए राजनीतिक उतार-चढ़ाव का कारण बन चुका है। बीजेपी का ‘रिटर्न गिफ्ट’ अब तक उस रूप में सामने नहीं आया जैसा पार्टी ने सोचा था। क्या वह इस ऐतिहासिक पल के बाद अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पा सकेगी, या बीजेपी के लिए राम मंदिर के प्रति उनसा योगदान भुला दिया जाएगा ... यह सवाल अब हर जुबां पर है, और इसके उत्तर का इंतजार भी सभी को है।

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