बिना काम किए मनरेगा में जारी कर दिए मस्टर रोल, जांच में सचिव, उपयंत्री और सहायक यंत्री दोषी
रीवा : जिले की जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत कैथा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। एक आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता के नाम पर उनकी जानकारी और सहमति के बिना मस्टर रोल जारी कर रोजगार दर्शाने तथा भुगतान दर्ज करने के मामले में जिला पंचायत की जांच में पंचायत के सचिव, तत्कालीन उपयंत्री और सहायक यंत्री को दोषी पाया गया है।
जिला पंचायत रीवा के मनरेगा शाखा के लेखाधिकारी योगेन्द्र पाण्डेय द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह खुलासा हुआ कि ग्राम पंचायत कैथा में खेत तालाब निर्माण कार्य के नाम पर हितग्राही के नाम से फर्जी तरीके से मस्टर रोल जारी किए गए। जांच प्रतिवेदन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत रीवा को अग्रिम कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है।
शिकायत से खुली फर्जीवाड़े की परतें
ग्राम कैथा निवासी सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनके निजी खेत में प्रस्तावित खेत तालाब निर्माण कार्य के लिए उनकी अनुमति के बिना उनके नाम पर व्यक्तिगत मस्टर रोल जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने मजदूरी की और न ही किसी प्रकार की सहमति दी।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2023-24 में खेत तालाब निर्माण कार्य के लिए 3 लाख 85 हजार 261 रुपये की तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई थी। कार्य लंबे समय तक बंद रहने के कारण हितग्राही ने 21 मई 2025 को केवल कार्य प्रारंभ कराने हेतु सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन पंचायत स्तर पर इस शिकायत का आधार बनाकर यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि हितग्राही की मांग पर ही मस्टर रोल जारी किए गए थे।
पोर्टल पर रोजगार और भुगतान भी दर्शाया गया
मनरेगा पोर्टल की जांच के दौरान पाया गया कि मस्टर रोल क्रमांक 9296, 9298 एवं 9299 में शिवानंद द्विवेदी का नाम दर्ज कर उन्हें 20 दिवस का रोजगार प्रदान किया जाना दर्शाया गया। इतना ही नहीं, उनके जॉब कार्ड पर 42.28 रुपये का भुगतान भी प्रदर्शित किया गया तथा 1617.36 रुपये की राशि देय (ड्यू) दिखायी गई।
जांच दल द्वारा जब संबंधित अभिलेखों और साक्ष्यों की मांग की गई तो तत्कालीन सचिव कार्यस्थल पर हितग्राही द्वारा मजदूरी किए जाने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। न तो मांग पत्र उपलब्ध कराया गया और न ही कार्यस्थल की तस्वीरें अथवा हस्ताक्षरित मस्टर रोल प्रस्तुत किए गए।
बिना कार्य हुए कर दिया मूल्यांकन और सत्यापन
जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य नहीं होने के बावजूद तत्कालीन उपयंत्री एवं सहायक यंत्री द्वारा ई-एमबी (eMB) प्रणाली में कार्य का मूल्यांकन तथा ऑनलाइन सत्यापन कर दिया गया। जांच अधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही, कर्तव्यहीनता एवं वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना है।
ये अधिकारी पाए गए दोषी
जांच रिपोर्ट में निम्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया है—
महेश पटेल, सचिव, ग्राम पंचायत कैथा (रोजगार सहायक का पद रिक्त होने के कारण मस्टर रोल जारी करने के लिए उत्तरदायी)
प्रवीण पाण्डेय, तत्कालीन उपयंत्री (बिना कार्य मूल्यांकन किए ऑनलाइन प्रविष्टि करने के दोषी)
निखिल मिश्रा, तत्कालीन सहायक यंत्री (बिना वास्तविक सत्यापन के कार्य स्वीकृत करने के दोषी)
कार्रवाई की तैयारी
31 पृष्ठों के विस्तृत जांच प्रतिवेदन को जिला पंचायत रीवा द्वारा आगे की वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दिया गया है। मामले के सामने आने के बाद मनरेगा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
No Previous Comments found.