बाढ़ की तबाही के बीच एक्शन मोड में रीवा प्रशासन!कमिश्नर-कलेक्टर ने गांवों में पहुंचकर देखी हकीकत

रीवा :  पचामा-राजापुर में घर-घर पहुंचे अफसर, पीड़ितों का दर्द सुना; छह परिवारों के पुनर्वास के निर्देश,जवा में 31 मकान क्षतिग्रस्त, पूरे क्षेत्र का सर्वे जल्द पूरा कर राहत राशि बांटने का सख्त आदेश

दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र से है जहां पर लगातार बारिश और बाढ़ से ग्रामीण क्षेत्रों में मची तबाही के बीच अब रीवा संभाग का प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। संभागायुक्त शीलेंद्र सिंह और कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी हकीकत देखी। पचामा की बसोरन बस्ती से लेकर टमस नदी किनारे बसे राजापुर तक अधिकारी प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों का सबसे ज्यादा जोर सर्वे में तेजी और राहत राशि के तत्काल वितरण पर रहा। कमिश्नर ने साफ कर दिया कि बाढ़ पीड़ितों के नुकसान का सर्वे किसी भी हालत में लापरवाही या कागजी खानापूर्ति का शिकार नहीं होना चाहिए।
घरों में घुसा पानी,प्रशासन पहुंचा पीड़ितों के बीच
पचामा की बसोरन बस्ती में कमिश्नर और कलेक्टर ने कई घरों में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों की स्थिति देखी। गुजरतिया बाई और हरिलाल सहित प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर अधिकारियों ने उनकी परेशानियां सुनीं और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
कमिश्नर ने एसडीएम और तहसीलदार को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सर्वे दल उतारे जाएं और घर-घर जाकर वास्तविक नुकसान दर्ज किया जाए।
मकान,घरेलू सामान और फसलों को हुए नुकसान का अलग-अलग आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे राहत’
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सर्वे दल प्रत्येक प्रभावित परिवार तक पहुंचे। शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र लोगों को राहत राशि दी जाए।
प्रशासन का संदेश साफ है—बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के नाम पर फाइलें आगे बढ़ाने में समय गंवाने के बजाय जमीनी स्तर पर तत्काल मदद पहुंचाई जाए।
बाढ़ के खतरे वाले छह घरों पर बड़ा फैसला
टमस नदी किनारे बसे राजापुर गांव में स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों ने बाढ़ की चपेट में आने वाले छह घरों को चिन्हित किया। कमिश्नर ने तहसीलदार को निर्देश दिए कि इन परिवारों को अलग सुरक्षित स्थान पर आवासीय पट्टे उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाए।
यानी प्रशासन अब सिर्फ तत्काल राहत तक सीमित नहीं है,बल्कि लगातार बाढ़ के खतरे वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है।
बसोरन बस्ती में राशन व्यवस्था की भी पड़ताल
निरीक्षण के दौरान उचित मूल्य दुकान की भी जांच की गई। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें दो माह का खाद्यान्न और नमक उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों ने खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को संतोषजनक पाया।
जवा में बारिश का कहर, 31 मकान आंशिक क्षतिग्रस्त
जवा तहसील के भनिगवां के बजरा टोला में भी कमिश्नर और कलेक्टर ने अतिवृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लिया। अधिकारियों को बताया गया कि यहां बाढ़ नहीं आई थी,लेकिन लगातार बारिश के कारण पुरानी गढ़ी की दीवार गिरने से एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ।गांव में सर्वे पूरा हो चुका है और 31 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पाए गए हैं।कमिश्नर ने जवा एसडीएम को निर्देश दिए कि पूरी तहसील में बाढ़ और अतिवृष्टि से हुए नुकसान का सर्वे जल्द पूरा कराकर पात्र पीड़ितों को राहत राशि का वितरण कराया जाए।
अब असली परीक्षा अमले की
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर कमिश्नर और कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन अब असली परीक्षा मैदानी अमले की है। कितनी तेजी से घर-घर सर्वे होता है, वास्तविक नुकसान कितने लोगों के रिकॉर्ड में दर्ज होता है और राहत राशि कब तक प्रभावित परिवारों के हाथों तक पहुंचती है—इस पर अब सबकी नजर रहेगी।
प्रशासन ने राहत और सर्वे को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में यदि निर्देशों के बावजूद कहीं लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की स्थिति भी बन सकती है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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