सवालों के घेरे में कलेक्टर कार्यालय की कार्यप्रणाली

रेवा - सवालों के घेरे में कलेक्टर कार्यालय की कार्यप्रणाली अपने ही आदेश का पालन न होने से राजस्व व्यवस्था पर उठे प्रश्न
मऊगंज जिले में एक ओर शासन द्वारा राजस्व अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों के निराकरण का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कलेक्टर कार्यालय की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम रामपुर तहसील नईगढ़ी से जुड़े एक भूमि प्रकरण में आदेश जारी होने के बाद भी वर्षों से कार्रवाई न होने का मामला सामने आया है।पीड़ित रामाधार वर्मा ने कलेक्टर को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। आवेदन के अनुसार वर्ष 2022 में खसरा नंबर 203, रकबा 18.35 एकड़ शासकीय भूमि से संबंधित प्रकरण में स्थल जांच के आदेश तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जारी किए गए थे। 07 अक्टूबर 2022 को राजस्व आदेश पत्र जारी कर अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।आवेदक का आरोप है कि आदेश के बावजूद आज तक न तो अंतिम जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत हुआ और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की गई। बताया गया है कि संबंधित फाइल अनुविभागीय कार्यालय में लंबित पड़ी है। पीड़ित ने 28 अक्टूबर 2025, 11नवंबर 2025, 25नवंबर 2025 एवं 13 जनवरी 2026 को भी जनसुनवाई के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई।पीड़ित का कहना है कि जब शासन स्वयं राजस्व महाअभियान चलाकर लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण की बात करता है, तब कलेक्टर कार्यालय द्वारा अपने ही आदेशों का पालन न किया जाना गंभीर प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है। इससे आमजन में असंतोष व्याप्त है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।मामले में आवेदक ने लंबित प्रकरण को तत्काल निराकृत करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण में क्या कदम उठाता है और पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है ?

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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