आजादी के 79 वर्ष बाद भी किसानों के सामने अस्तित्व का संकट

रेवा - एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्जमुक्ति के संघर्ष को तेज करने की जरूरत 17 जून को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक, 29 जुलाई को एसकेएम - सीटीयू का राष्ट्रीय सम्मेलन। किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 342वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। पंचायत में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने सी-2+50 प्रतिशत फार्मूले के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी एवं सरकारी खरीद सुनिश्चित करने,₹20,000 करोड़ के कथित एफसीआई साइलो घोटाले,नर्मदा घाटी,महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़,बिहार,पंजाब और हरियाणा के किसानों-मजदूरों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। किसान पंचायत में राष्ट्रीय हितों को प्रभावित करने वाले मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विरोध, न्यूनतम मजदूरी, रोजगार का अधिकार, व्यापक कर्जमाफी, चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) एवं वी.बी. ग्रामजी अधिनियम 2025 की वापसी,बिजली के निजीकरण, बीज विधेयक के विरोध तथा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 (एलएआरआर एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर भी विचार व्यक्त किए गए। किसान पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी किसानों की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। सभी सरकारों ने किसानों के कल्याण के दावे किए, लेकिन खेती लगातार घाटे का सौदा बनती गई। कृषि लागत और महंगाई में जिस अनुपात में वृद्धि हुई, उस अनुपात में कृषि उत्पादों के दाम नहीं बढ़े। परिणामस्वरूप किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता गया। इसलिए किसानों की कर्जमुक्ति, एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसान पेंशन और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे संयुक्त किसान मोर्चा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने, भंडारण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने, बीज विधेयक तथा बिजली विधेयक जैसे कदमों से किसानों का संकट और गहरा गया है। उन्होंने बताया कि वे महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचने के विरोध में विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में पंढरपुर में चल रहे अनशन में शामिल होने पंढरपुर पहुंचे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि यदि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप खरीदी हो तो गेहूं ₹3500 तथा डॉलर चना ₹10,000 प्रति क्विंटल तक बिक सकता है। उन्होंने कहा कि किसान जैविक खेती के पक्ष में हैं, लेकिन जैविक उत्पादों की खरीद की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने नर्मदा नदी के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि  अधिकारी भी दूषित पानी से सिंचित फसलों को जैविक प्रमाणन नही दे पा रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि हाल ही में कपास आयात पर शुल्क हटाने के फैसले से कपास उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि 17 जून को संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक तथा 29 जुलाई को एसकेएम और सीटीयू का राष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली में आयोजित होगा।
 किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील भारतीय किसानों पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे किसानों की तबाही का रास्ता तैयार किया जा रहा है तथा अन्न भंडारण व्यवस्था में बड़े कॉरपोरेट घरानों को एकाधिकार दिया जा रहा है। हरियाणा से राष्ट्रीय किसान मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने कहा कि संघर्ष की नई शुरुआत पंजाब की धरती से होगी और किसान अपने अधिकारों की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाएंगे। पंजाब किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव गुरनाम सिंह भिक्की ने आरोप लगाया कि सरकार  देश की संप्रभुता को सुरक्षित रखने में  नाकामयाब रही है। अमेरिकी कंपनियों के दबाव में किसानों के हितों की अनदेखी की है। छत्तीसगढ़ से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराज विद्रोही ने कहा कि उर्वरकों की कमी के कारण पिछले वर्ष उत्पादन प्रभावित हुआ था और इस वर्ष भी खाद की उपलब्धता कम होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के कर्ज़माफी का वादा किया था जो पूरा किया जा रहा है। जिससे किसानों में आक्रोश है। किसान पंचायत को प्रदेश अध्यक्ष एड. आराधना भार्गव, राष्ट्रीय प्रवक्ता एड. शिवसिंह, किसान जागृति संगठन के प्रमुख इरफान जाफरी, मालवा-निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री तथा प्रदेश सचिव शत्रुघ्न यादव सहित अनेक नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण बहुजन संवाद यूट्यूब चैनल एवं फेसबुक पेज पर किया गया। उक्त जानकारी किसान संघर्ष समिति राष्ट्रीय कार्यालय सचिव भागवत परिहार ने दी है।

रिपोर्टर - अर्जुन  तिवारी 

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