टोंस हाइडल प्रोजेक्ट की WBM सड़क में बड़ा खेल? ग्रामीणों ने खोली निर्माण की पोल
रीवा - सिरमौर क्षेत्र स्थित मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के टोंस हाइडल प्रोजेक्ट के अंतर्गत निर्माणाधीन WBM सड़क एक बार फिर गंभीर विवादों से घिर गई है। सड़क निर्माण में नहर की मिट्टी की खुदाई से निकले मलवे का उपयोग किए जाने के आरोपों ने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो मौके पर मौजूद ठेकेदार के कथित कर्मचारी सुनील सिंह के द्वारा दो टूक जवाब दिया गया कि—"हमें ऊपर से आदेश है,यही सामग्री इस्तेमाल होगी।" यह कथित बयान अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। आखिर वह "ऊपर" कौन है,जिसके आदेश का हवाला देकर निर्माण मानकों पर सवाल उठाने वालों को नजरअंदाज किया जा रहा है? ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानक सामग्री के बजाय नहर की मिट्टी की खुदाई से निकला मलवा डाला जा रहा है, जिससे सड़क की गुणवत्ता और उसकी आयु दोनों प्रभावित हो सकती हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना में यदि तकनीकी मानकों से समझौता किया जा रहा है तो यह सीधे-सीधे जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि गुणवत्ता पर सवाल उठाने के बजाय ठेकेदार के कथित कर्मचारी सुनील सिंह ने दबंगई भरा रवैया अपनाया और "ऊपर से आदेश" का हवाला देकर आपत्तियों को खारिज कर दिया। इससे लोगों में भारी नाराजगी है और पूरे निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वास्तव में ऐसा कोई आदेश दिया गया है, तो क्या वह विभागीय नियमों, स्वीकृत DPR और तकनीकी मानकों के अनुरूप है? यदि नहीं, तो आखिर किसके संरक्षण में यह निर्माण कार्य किया जा रहा है? ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण तथा पूरे निर्माण कार्य का उच्चस्तरीय निरीक्षण कराया जाए। साथ ही, यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल
क्या WBM सड़क निर्माण में वास्तव में मानकों के विपरीत सामग्री का उपयोग किया जा रहा है?
ठेकेदार का कर्मचारी जिस "ऊपर से आदेश" की बात कर रहा है, वह किस अधिकारी या स्तर से दिया गया?
क्या सरकारी धन से बन रही सड़क में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है?
यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो विभाग सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहा? फिलहाल इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
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