रीवा में सोनम वांगचुक की हिरासत के विरोध में जनाक्रोश, कमिश्नरी के सामने धरना-प्रदर्शन

रेवा - दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन के दौरान प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के विरोध में शनिवार को रीवा कमिश्नरी के समक्ष विभिन्न संगठनों,छात्र-छात्राओं, युवाओं, किसानों, अधिवक्ताओं, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन से घबरा गई है और बिना किसी सार्थक संवाद के सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया। कुछ वक्ताओं ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने डॉक्टरों के वेश में पहुंचकर कार्रवाई की, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजनीतिक नारे लगाए। उन्होंने "देश के सामने सरेंडर करें नरेंद्र मोदी" जैसे नारे लगाए और कहा कि यदि गांधीवादी तरीके से चल रहे आंदोलनों का सम्मान नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

धरने में वक्ताओं ने सरकार को "संविधान और लोकतंत्र विरोधी तानाशाही हुकूमत" बताते हुए आरोप लगाया कि "जुल्मी हुकूमत को अब EVM भी नहीं बचा पाएगी।" यह सभी टिप्पणियां और नारे प्रदर्शनकारियों द्वारा व्यक्त किए गए।
धरना-प्रदर्शन के समापन पर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे,नीट पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा लोकतांत्रिक आंदोलनों के दमन पर रोक लगाने की मांग की गई।

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी

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