अध्यक्ष-CMO की कथित मिलीभगत पर सवाल, पार्षदों का पारिश्रमिक रोकने से गुढ़ नगर परिषद में बढ़ा विवाद

गुढ़ : नगर परिषद गुढ़ में अध्यक्ष और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब पार्षदों के पारिश्रमिक भुगतान तक पहुंच गया है। पार्षदों ने नगर परिषद अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) पर कथित मिलीभगत से भुगतान रोकने और दबाव की राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष के कथित दबाव में CMO द्वारा पार्षदों के निर्धारित पारिश्रमिक के भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पारिश्रमिक किसी व्यक्ति विशेष की मेहरबानी नहीं, बल्कि नियमों के तहत देय राशि है। ऐसे में इसे रोकने का अधिकार और आधार स्पष्ट होना चाहिए।

आखिर किसके आदेश पर रोका गया भुगतान?

पार्षदों ने सीधे सवाल खड़ा किया है कि यदि पारिश्रमिक रोकने के पीछे कोई वैधानिक कारण है तो नगर परिषद प्रशासन उसे लिखित आदेश के साथ सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा? किस अधिकारी या प्राधिकारी के आदेश पर भुगतान रोका गया है? संबंधित आदेश में कौन-सा नियम या प्रावधान लागू किया गया है?
पार्षदों का कहना है कि यदि कोई कानूनी अड़चन नहीं है और फिर भी भुगतान रोका गया है, तो यह प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने की कोशिश का मामला हो सकता है।

अध्यक्ष और CMO की भूमिका पर उठे सवाल

पार्षदों ने अध्यक्ष और CMO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि कथित मिलीभगत के जरिए निर्वाचित पार्षदों के अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अब सवाल सिर्फ पारिश्रमिक का नहीं, बल्कि नगर परिषद की प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। यदि भुगतान रोकने का निर्णय नियमसम्मत है तो उसका आदेश सामने आना चाहिए और यदि कोई आदेश ही नहीं है तो भुगतान रोकने की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

जनता के सामने कब आएगा सच?

गुढ़ नगर परिषद में पहले से चल रहे राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के बीच पार्षदों के पारिश्रमिक का मुद्दा नया मोर्चा खोलता दिखाई दे रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नगर परिषद अध्यक्ष और CMO इस मामले में क्या आधिकारिक जवाब देते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—पार्षदों का पारिश्रमिक आखिर किसके आदेश पर रोका गया? क्या इसका कोई लिखित आदेश मौजूद है? और यदि आदेश है तो भुगतान रोकने का कानूनी आधार क्या है?
अध्यक्ष और CMO का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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