सीएम हेल्पलाइन की 50 शिकायतों पर गुढ़ नगर परिषद में घमासान,ग्रेडिंग चमकाने के खेल के आरोप CMO मोहित शुक्ला पर उठे सवाल

गुढ़ : नगर परिषद गुढ़ की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला सीधे सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण और नगर परिषद की ग्रेडिंग से जुड़ा है। वार्ड क्रमांक 2 की पार्षद श्रीमती गीता तिवारी ने जिला कलेक्टर रीवा को पत्र भेजकर नगर परिषद से संबंधित लंबित शिकायतों का समयबद्ध निराकरण कराने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

पार्षद के अनुसार नगर परिषद गुढ़ से संबंधित करीब 50 शिकायतें लंबित हैं। आरोप है कि कई शिकायतों के दर्ज होने के 20 से 30 दिन बाद तक भी नागरिकों की समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो सका। बारिश के मौसम में जलभराव और अन्य मूलभूत समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं, लेकिन शिकायतों के निराकरण में देरी ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रेडिंग सुधारने के लिए शिकायतों के आंकड़ों से खेल का आरोप
मामला सिर्फ लंबित शिकायतों तक सीमित नहीं है। नगर परिषद की ग्रेडिंग बेहतर दिखाने के लिए शिकायतों के आंकड़ों में कथित हेरफेर और शिकायतें दर्ज कराकर बाद में उनका निराकरण दिखाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक मातहत कर्मचारियों के माध्यम से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गईं और बाद में उन्हीं शिकायतों को निराकृत दिखाकर बंद कराया गया। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी शिकायत प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला हो सकता है।
50 शिकायतें हैं तो जवाब भी सामने आना चाहिए
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 50 शिकायतें किन लोगों के नाम से दर्ज हुईं? शिकायतों में किस समस्या का उल्लेख था? क्या संबंधित अधिकारी या कर्मचारी वास्तव में मौके पर पहुंचे? क्या समस्या का समाधान हुआ? क्या शिकायतकर्ता से निराकरण की पुष्टि ली गई? और शिकायत बंद करने से पहले उसका स्वतंत्र सत्यापन किया गया या नहीं?
अगर शिकायतें वास्तविक नागरिक समस्याओं से जुड़ी थीं तो उनके निराकरण की दस्तावेजी कार्रवाई, मौके की रिपोर्ट और शिकायतकर्ता की पुष्टि सामने आनी चाहिए। वहीं यदि शिकायतें केवल आंकड़े और ग्रेडिंग सुधारने के लिए दर्ज कराई गई थीं तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
CMO की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
पूरे मामले में नगर परिषद गुढ़ के CMO मोहित शुक्ला की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर नगर परिषद में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की मॉनिटरिंग किस स्तर पर होती है? लंबित शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायतों के निराकरण की वास्तविकता की जांच किस अधिकारी ने की? और यदि रिकॉर्ड में शिकायतें निराकृत दिखाई गईं तो क्या उनका भौतिक सत्यापन कराया गया?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल CMO मोहित शुक्ला का पक्ष सामने नहीं आया है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
पार्षद श्रीमती गीता तिवारी ने जिला कलेक्टर रीवा से मांग की है कि नगर परिषद गुढ़ की सभी लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि रिकॉर्ड में दर्ज निराकरण वास्तव में जमीन पर हुआ है या नहीं। साथ ही लापरवाही अथवा अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं। क्या प्रशासन करीब 50 शिकायतों की फाइल खोलकर एक-एक शिकायत का मौके पर सत्यापन कराएगा? क्या यह पता चलेगा कि नागरिकों की समस्याएं वास्तव में हल हुईं या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में आंकड़े दुरुस्त किए गए?
यदि निष्पक्ष जांच होती है तो नगर परिषद गुढ़ की सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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