गुढ़ नगर परिषद में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीएम कार्यालय सख्त

रेवा - पार्षदों की शिकायत पर जांच के निर्देश,CMO मोहित शुक्ला पर वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी के आरोप। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से है जहां पर नगर परिषद गुढ़ की कार्यप्रणाली को लेकर नाराज पार्षदों द्वारा मुख्यमंत्री को की गई शिकायत के बाद मामला अब प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। शिकायत में मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोहित शुक्ला पर वित्तीय अनियमितताओं, नियमों की कथित अनदेखी, निर्माण कार्यों में अनियमितता, शासन की राशि के उपयोग, संविदा कर्मचारियों के भुगतान, जनप्रतिनिधियों के मानदेय रोकने और पार्षदों के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पार्षदों की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव द्वारा मामले में कड़ी नाराजगी जताए जाने और फटकार के बाद नगर परिषद के पार्षदों का रोका गया मानदेय जारी कर दिया गया है। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा विवाद और भी चर्चा में आ गया है।

बिना बजट और टेंडर के कार्य कराने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट विधिवत स्वीकृत होने से पहले ही विभिन्न कार्य कराए गए। इसके अलावा जिन कार्यों में नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया आवश्यक थी, उन्हें कथित रूप से छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर कार्य कराने और भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। पार्षदों ने ऐसे सभी कार्यों की तकनीकी, वित्तीय और दस्तावेजी जांच कराने की मांग की है। संविदा कर्मचारियों के भुगतान पर भी उठे गंभीर सवाल शिकायत में नगर परिषद के संविदा कर्मचारियों को किए गए कथित अनियमित भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित राशि की वसूली को लेकर न्यायालय के निर्देश के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पार्षदों ने पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

मानदेय रोकने पर बढ़ा विवाद नगर परिषद के पार्षदों के जुलाई माह के मानदेय का भुगतान रोके जाने को लेकर भी जनप्रतिनिधियों में नाराजगी थी। पार्षदों ने आरोप लगाया था कि मानदेय रोककर उन्हें परेशान किया जा रहा है। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद सचिव स्तर से कड़ी नाराजगी जताए जाने के पश्चात पार्षदों का लंबित मानदेय जारी कर दिया गया। मानदेय जारी होने के बाद पार्षदों ने इसे अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई का परिणाम बताया है।
अनुदान राशि और बिल-वाउचर पर गंभीर आरोप शिकायत में शासन से प्राप्त अनुदान राशि को कथित रूप से अन्य मदों में हस्तांतरित करने तथा फर्जी बिल-वाउचर के माध्यम से भुगतान किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके साथ ही गुणवत्ताविहीन सड़क निर्माण के कारण पूर्व सीएमओ द्वारा रोकी गई करीब 15 लाख रुपये की राशि बाद में भुगतान किए जाने का भी दावा किया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। कथित फर्जी नियुक्ति का मामला भी शिकायत में नगर परिषद में सज्जन कछवाह की कथित फर्जी नियुक्ति का मामला भी शिकायत में शामिल किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फर्जी अंकसूची के आधार पर नियुक्ति का मामला सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति को सेवा से पृथक किया गया, लेकिन कथित तौर पर वसूली और पुलिस कार्रवाई नहीं की गई। पार्षदों ने इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 15 जुलाई की बैठक में ताला लगाने का आरोप शिकायत में 15 जुलाई 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि विधायक प्रतिनिधि और 13 पार्षद नगर विकास तथा मुख्यमंत्री के जनसंवाद से जुड़े विषयों की समीक्षा के लिए बैठक करना चाहते थे। आरोप है कि इस दौरान परिषद सभाकक्ष में ताला लगवा दिया गया और पार्षदों को बैठक करने से रोक दिया गया।
पार्षदों ने इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की कथित अनदेखी बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
जलभराव, सफाई और जर्जर भवनों पर भी सवाल

बारिश के दौरान नगर में जलभराव रोकने की व्यवस्था, नियमित साफ-सफाई और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा नगर में मौजूद जर्जर भवनों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए संभावित दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने सीएमओ पर मुख्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहने का आरोप भी लगाया है। शिकायत में दावा किया गया है कि उनका निवास गुढ़ से करीब 100 किलोमीटर दूर ब्यौहारी में है। पार्षदों का कहना है कि इससे नगर परिषद के दैनिक कामकाज और आम जनता से जुड़े मामलों पर असर पड़ने की आशंका है। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

3 अगस्त के घेराव के बाद मामला और गरमाया

नगर परिषद को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रहा है। शिकायत में 3 अगस्त 2026 को पार्षदों और नागरिकों द्वारा नगर परिषद के घेराव का भी उल्लेख किया गया है। उस दौरान भी सीएमओ और परिषद अध्यक्ष के खिलाफ जांच तथा कार्रवाई की मांग उठाई गई थी। अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने, जांच के निर्देश दिए जाने और मानदेय प्रकरण में हस्तक्षेप के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें

पार्षदों ने मुख्यमंत्री से नगर परिषद गुढ़ में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने वित्तीय लेन-देन, बिल-वाउचर, भुगतान, निर्माण कार्यों, नियुक्तियों और शासन से प्राप्त अनुदान की उपयोगिता की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सीएमओ मोहित शुक्ला के निलंबन और अन्यत्र स्थानांतरण की मांग भी की गई है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की सख्ती के बाद पार्षदों का लंबित मानदेय जारी होना इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रस्तावित जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और उसके आधार पर प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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