राहत शिविर के भोजन पर बवाल,बाढ़ पीड़ितों की थाली में सब्जी के नाम पर पानी?

रीवा - जिले में भारी बारिश के बाद कई इलाकों में बने बाढ़ जैसे हालात के बीच प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव शिविर संचालित किए जा रहे हैं। दावा है कि इन शिविरों में संकट से जूझ रहे परिवारों को भोजन सहित तमाम जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लेकिन टीआरएस कॉलेज में संचालित बताए जा रहे राहत एवं बचाव शिविर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राहत व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

वायरल वीडियो में बाढ़ प्रभावित लोगों को परोसी जा रही सब्जी में पानी की मात्रा बेहद अधिक और सब्जी की मात्रा बेहद कम दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में प्रशासन के भरोसे पहुंचे हैं, तब उन्हें भोजन के नाम पर आखिर क्या परोसा जा रहा है? आपदा में भी भोजन की गुणवत्ता से समझौता?

बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित परिवार पहले ही मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में राहत शिविर उनके लिए प्रशासन से मदद की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं। लेकिन यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति वास्तविक है, तो यह केवल भोजन की गुणवत्ता का मामला नहीं बल्कि आपदा प्रबंधन की संवेदनशीलता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि राहत शिविरों में भोजन वितरण की जिम्मेदारी चाहे जिस एजेंसी या संस्था की हो, उसकी नियमित जांच और निगरानी प्रशासन की जिम्मेदारी है। आपदा के समय पीड़ितों की थाली तक पहुंचने वाले भोजन में किसी भी तरह की लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। टीआरएस कॉलेज के राहत शिविर का बताया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को टीआरएस कॉलेज में संचालित राहत एवं बचाव शिविर का बताया जा रहा है, जहां बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन वितरित किया जा रहा था। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि भोजन किस एजेंसी अथवा ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा था। यही वजह है कि वायरल वीडियो की वास्तविकता सामने लाने के लिए प्रशासनिक जांच बेहद जरूरी हो गई है। यदि वीडियो सही है तो भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है।
सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था

सबसे बड़ा सवाल यह है कि राहत शिविरों में भोजन की गुणवत्ता की जांच आखिर कौन कर रहा है? क्या भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता और मात्रा की नियमित निगरानी की जा रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा राहत शिविरों का निरीक्षण किया जा रहा है या फिर कागजी रिपोर्टों के भरोसे ही पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है? वायरल वीडियो ने इन सवालों को और तीखा कर दिया है। अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा

आपदा की घड़ी में राहत शिविर केवल भोजन बांटने की जगह नहीं होते, बल्कि वे प्रशासन की मानवीय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की परीक्षा होते हैं। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाले भोजन को लेकर सामने आया यह वीडियो गंभीरता से जांच का विषय है। अब निगाह जिला प्रशासन पर है कि वह वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर टीआरएस कॉलेज राहत शिविर में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था की जांच कराता है या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग भी उठना तय है। आपदा में पीड़ितों की थाली तक पहुंचने वाले भोजन में लापरवाही के आरोपों को दबाने के बजाय उसकी निष्पक्ष जांच ही प्रशासन की संवेदनशीलता का असली पैमाना होगी।

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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