“चाहे जितना जुल्म कर लो, आंदोलन नहीं रुकेगा” — मित्रेश चतुर्वेदी
रेवा - आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सवर्ण समाज के आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और प्रदर्शन में शामिल होने से रोके जाने का विरोध करते हुए कहा, “चाहे जितना जुल्म कर लो,यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।”
मित्रेश चतुर्वेदी ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर सवर्ण समाज के भीतर लंबे समय से मौजूद असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है। उन्होंने कहा, “सवर्णों के अंदर जो चिंगारी दहकी है, वह आग बनेगी जरूर।” उनके मुताबिक समाज की मांगों को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए संवाद और समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए।
आवाज दबाने से खत्म नहीं होंगे सवाल
मित्रेश चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने वाले लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की आवाज दबाने से उसके मूल सवाल खत्म नहीं होते, बल्कि असंतोष और गहरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने आंदोलनकारियों से संयम बनाए रखने तथा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की।
“दमन से आंदोलन टूटता नहीं, मजबूत होता है”
राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सवर्ण समाज की मांगों को अब नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और समान अधिकारों की मांग को लेकर है। उन्होंने सरकार से टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय आंदोलनकारियों के साथ संवाद करने और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने की मांग की।
मांगों पर संवाद तक जारी रहेगा संघर्ष
मित्रेश चतुर्वेदी ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि जब तक मांगों पर सार्थक संवाद और समाधान की दिशा में पहल नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कदम न उठाएं और अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से मजबूती के साथ उठाते रहें। चतुर्वेदी के इस बयान के बाद आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज होने की संभावना है।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
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