राखी द्विवेदी की तस्वीर पर टिप्पणी करने वालों को पंडित सतीश चौबे की दो टूक

रेवा - जन्मदिन और रक्षाबंधन पर विंध्य की बेटी को दी शुभकामनाएं,बोले कलाकार की कला को राजनीति की कसौटी पर कसना संकीर्ण मानसिकता। विंध्य की लोकगायिका एवं प्रतिभाशाली कलाकार राखी द्विवेदी के जन्मदिन और रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज युवा मोर्चा,मध्य प्रदेश के प्रदेश सचिव पंडित सतीश चौबे ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मां सरस्वती से राखी द्विवेदी के उज्ज्वल भविष्य,निरंतर सफलता और कला के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करने की कामना की। इसी दौरान सोशल मीडिया पर राखी द्विवेदी की तस्वीर और उनकी प्रस्तुति को लेकर की जा रही टिप्पणियों पर पंडित सतीश चौबे ने कड़ा और दो टूक एतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है,लेकिन किसी कलाकार और खासकर किसी बहन-बेटी की गरिमा को राजनीतिक विवाद का हथियार बनाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

“नेता की आलोचना करनी है तो सीधे नेता से सवाल करो”

पंडित चौबे ने कहा कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में किसी व्यक्ति के सम्मान में गीत प्रस्तुत करना उस व्यक्ति की हर नीति,हर निर्णय और पूरी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन नहीं माना जा सकता। कलाकार का अपना दायित्व कला और संस्कृति को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार की एक प्रस्तुति या तस्वीर को आधार बनाकर उसे राजनीतिक समर्थन अथवा विरोध के खांचे में डालना बेहद संकीर्ण सोच है। यदि किसी नेता की कार्यशैली, नीतियों या फैसलों से असहमति है तो खुलकर सवाल किए जाएं, जनहित के मुद्दों पर बहस हो और राजनीतिक जवाबदेही तय की जाए।

लेकिन इसके लिए किसी महिला कलाकार की तस्वीर और व्यक्तिगत गरिमा को निशाना बनाना उचित नहीं है। सोशल मीडिया की राजनीति पर भी साधा निशाना चौबे ने कहा कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस के नाम पर भाषा और मर्यादा की सीमाएं लगातार टूट रही हैं। असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है,लेकिन असहमति व्यक्त करने के नाम पर व्यक्तिगत टिप्पणियां और महिला सम्मान को चोट पहुंचाने वाली भाषा किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने दो टूक कहा—

“विचारों से लड़िए, नीतियों पर सवाल उठाइए,नेताओं से जवाब मांगिए,लेकिन बहन-बेटियों के सम्मान को राजनीति के मैदान में मत घसीटिए।” उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक पहचान केवल उसकी राजनीतिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, मर्यादा और नारी सम्मान से होती है। राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन सामाजिक मर्यादा और महिला सम्मान पर समझौता नहीं होना चाहिए। “राखी को विवादों से नहीं, प्रतिभा से पहचाना जाना चाहिए” पंडित सतीश चौबे ने कहा कि राखी द्विवेदी अपनी मधुर आवाज और कला के माध्यम से विंध्य की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी उपलब्धियां पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने कहा कि एक कलाकार को उसकी मेहनत,प्रतिभा और कला के लिए पहचाना जाना चाहिए,न कि सोशल मीडिया के राजनीतिक विवादों के चश्मे से। किसी कलाकार की कला को राजनीतिक कसौटी पर कसना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि कला और संस्कृति की स्वतंत्रता को भी सीमित करता है। चौबे ने कहा कि यदि किसी प्रस्तुति को लेकर किसी को राजनीतिक असहमति है तो उसका जवाब तर्क,तथ्य और वैचारिक बहस से दिया जाना चाहिए। व्यक्तिगत टिप्पणी या उपहास किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा नहीं हो सकता।

पंडित सतीश चौबे ने राखी द्विवेदी को जन्मदिन एवं रक्षाबंधन पर्व की पुनः हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मां सरस्वती की कृपा से राखी द्विवेदी निरंतर सफलता प्राप्त करें और अपनी कला के माध्यम से विंध्य का नाम देश-दुनिया में रोशन करती रहें। उन्होंने अंत में स्पष्ट संदेश दिया कि राजनीति में विरोध और समर्थन चलता रहेगा,लेकिन बहन-बेटियों के सम्मान और सामाजिक मर्यादा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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