झाड़ियों में छिपा शराब का जखीरा! चोरहटा पुलिस का बड़ा वार

रेवा - किराए की दुकान के पास बनाया अवैध शराब का ठिकाना,5 पेटी यानी करीब 42 लीटर शराब बरामद—असली कारोबारी कौन? मकान मालिक की भूमिका भी जांच के घेरे में। रीवा जिले में अवैध शराब के कारोबार पर पुलिस की लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद धंधेबाज किस तरह नए-नए ठिकाने तलाश रहे हैं, इसकी एक तस्वीर चोरहटा थाना क्षेत्र के अगडाल में सामने आई है। यहां सड़क किनारे झाड़ियों को कथित तौर पर शराब के गुप्त गोदाम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। मुखबिर की सूचना पर चोरहटा पुलिस और डायल-112 की टीम ने दबिश दी तो झाड़ियों और दुकान के आसपास छिपाकर रखा गया 5 पेटी यानी करीब 42 लीटर अवैध शराब का स्टॉक बरामद हुआ।बताया जा रहा है कि पुलिस को अगडाल में किराए की दुकान से अवैध शराब की बिक्री किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान दुकान के पास और सड़क किनारे झाड़ियों में छिपाकर रखा गया शराब का स्टॉक पुलिस के हाथ लगा।

बरामद शराब में एक पेटी गोवा व्हिस्की और चार पेटी देशी प्लेन शराब शामिल बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब का खुलेआम कारोबार और फिर पुलिस से बचाने के लिए उसे झाड़ियों में छिपाकर रखना पूरे मामले को गंभीर बनाता है।
झाड़ियों के पीछे कौन? पुलिस ने बरामद शराब के मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर झाड़ियों में शराब का यह जखीरा किसने छिपाया था? शराब कहां से लाई गई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था? पुलिस के सामने एक और अहम सवाल किराए की दुकान को लेकर भी है। यदि दुकान का इस्तेमाल अवैध शराब की बिक्री के लिए किया जा रहा था तो इसकी जानकारी किसे थी? क्या दुकान मालिक को इसकी भनक थी या फिर उसके नाम से किराए की दुकान लेकर कोई और शराब का अवैध कारोबार संचालित कर रहा था?

अज्ञात आरोपी से असली कारोबारी तक पहुंचना चुनौती फिलहाल पुलिस ने मामला अज्ञात आरोपी के खिलाफ दर्ज किया है। अब जांच की दिशा इस बात पर टिकी है कि पुलिस बरामद शराब के पीछे मौजूद असली कारोबारी और सप्लाई नेटवर्क तक कब पहुंचती है। चोरहटा पुलिस की कार्रवाई से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन 5 पेटी शराब का यह जखीरा केवल बरामदगी तक सीमित न रह जाए, यह देखना अहम होगा। असली सवाल यही है—झाड़ियों में शराब किसने छिपाई, किराए की दुकान से कौन कारोबार चला रहा था और इस नेटवर्क के पीछे आखिर कौन-कौन लोग जुड़े हैं?

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी

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