रीवा के संजय गांधी अस्पताल में आखिर चल क्या रहा है?

कल जिंदा व्यक्ति को मृत बताने के आरोप से मचा हड़कंप,आज कुत्ते के काटने वाले मरीज को सांप के काटने का इंजेक्शन लगाने का आरोप। एक के बाद एक विवादित मामले,मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल,हाईलेवल बैठक और आश्वासनों के बाद अब कार्रवाई की बारी दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय का है जहां व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल अब थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक विवाद खत्म नहीं होता कि दूसरा मामला अस्पताल की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर देता है। कल जिस व्यक्ति को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की बात सामने आई और बाद में उसके जीवित मिलने की जानकारी से हड़कंप मच गया था,अब आज एक मरीज को गलत इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप सामने आने से अस्पताल की व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।बताया जा रहा है कि कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे मरीज को कथित तौर पर सांप के काटने के उपचार में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला बेहद गंभीर माना जाएगा। सवाल सिर्फ एक इंजेक्शन का नहीं, बल्कि मरीज की पहचान, बीमारी की सही जानकारी, उपचार प्रक्रिया और दवा देने से पहले बरती जाने वाली सावधानी का है।

कल मौत की घोषणा पर सवाल,आज इंजेक्शन पर बवाल

संजय गांधी अस्पताल में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ मृत घोषित किए गए व्यक्ति के जीवित मिलने की घटना ने मेडिकल जांच और मृत्यु की पुष्टि की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ अब गलत इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप ने दवा और उपचार व्यवस्था की निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आखिर मरीज को दवा देने से पहले उसकी बीमारी और उपचार की पुष्टि कैसे की जाती है? क्या दवा देने की प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है? क्या मरीज के उपचार की निगरानी के लिए पर्याप्त व्यवस्था है? और सबसे बड़ा सवाल—अगर इतनी गंभीर गलती होती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है?  हर मामले के बाद जांच, लेकिन सवाल जस के तस संजय गांधी अस्पताल को लेकर पहले भी कई बार व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठते रहे हैं। गंभीर घटनाओं के बाद जांच, बैठक और कार्रवाई के आश्वासन सामने आते हैं, लेकिन नए मामलों का सामने आना यह सवाल पूछने को मजबूर करता है कि क्या सुधार सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित है? स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हाईलेवल बैठक भी हो चुकी है। व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की बात कही गई, लेकिन अब सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर आखिर बदलाव कब दिखाई देगा? मरीज अस्पताल में इलाज कराने आता है, प्रयोग कराने नहीं सरकारी अस्पताल में आने वाला मरीज इस भरोसे के साथ आता है कि उसे सुरक्षित और निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज मिलेगा। ऐसे में यदि कुत्ते के काटने वाले मरीज को कथित तौर पर सांप के काटने का इंजेक्शन लगाए जाने जैसी शिकायत सामने आती है, तो इसकी निष्पक्ष और तत्काल जांच जरूरी हो जाती है। मामला सही है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अगर आरोप गलत है तो अस्पताल प्रबंधन को तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अब सिर्फ बैठक नहीं, जवाबदेही चाहिए
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब मरीजों और उनके परिजनों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—संजय गांधी अस्पताल में आखिर चल क्या रहा है? एक तरफ जिंदा व्यक्ति को मृत बताने का आरोप, दूसरी तरफ गलत इंजेक्शन लगाए जाने की शिकायत और इनके बीच लगातार उठते सवाल। ऐसे में अब महज जांच और आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो,मेडिकल प्रोटोकॉल की समीक्षा हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।फिलहाल कुत्ते के काटने वाले मरीज को कथित तौर पर सांप के काटने का इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप की तथ्यात्मक पुष्टि का इंतजार है। लेकिन आरोप ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि रीवा के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा आखिर कितनी सुरक्षित है?

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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