कल्पना मिश्रा की मौत पर सियासी घमासान! चाचा धर्मेंद्र का विपक्ष पर तीखा हमला दर्द पर राजनीति नहीं हमें सिर्फ न्याय चाहिए
रेवा - कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप,धर्मेंद्र बोले ‘परिवार के जख्मों को सियासी मुद्दा बनाना बंद करें’। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय से है जहां प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अस्पताल की कथित लापरवाही को लेकर उठे सवालों के बीच अब इस दुखद घटना पर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। इसी बीच मृतका के चाचा धर्मेंद्र ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि परिवार के दर्द और त्रासदी को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
धर्मेंद्र ने दो टूक शब्दों में कहा कि परिवार को राजनीति नहीं, न्याय चाहिए। कल्पना और उसके नवजात की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और ऐसे समय में राजनीतिक दलों द्वारा इस घटना को अपने-अपने सियासी एजेंडे का हिस्सा बनाना परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
‘दुख हमारा है, राजनीति करने का अधिकार किसी को नहीं’
मृतका के चाचा धर्मेंद्र ने विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि अस्पताल में लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन परिवार के दुख को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने राजनीतिक दलों से साफ कहा कि घटना का राजनीतिकरण बंद करें और परिवार को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में बाधा न बनें। उनका कहना है कि परिवार की प्राथमिकता सिर्फ यह जानना है कि आखिर कल्पना और उसके नवजात की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो। अस्पताल की कथित लापरवाही से लेकर सियासत तक,मामला गरमाया
कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के बाद संजय गांधी अस्पताल की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी को लेकर पहले ही गंभीर सवाल उठ चुके हैं। जांच और कार्रवाई की मांग के बीच विपक्षी दल लगातार सरकार और अस्पताल प्रबंधन को घेर रहे हैं। अब मृतका के परिवार की ओर से ही विपक्षी दलों पर निशाना साधे जाने के बाद मामला अस्पताल की कथित लापरवाही से निकलकर सीधे सियासी टकराव के केंद्र में पहुंच गया है। ‘हमें भाषण नहीं, न्याय चाहिए’धर्मेंद्र के बयान का सीधा संदेश है कि परिवार को राजनीतिक मंचों से सहानुभूति या बयानबाजी नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और न्याय चाहिए। परिवार चाहता है कि जांच किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर हो और यदि जांच में किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ बिना किसी दबाव के कठोर कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि कल्पना और उसके नवजात की मौत की असली जिम्मेदारी किसकी है? क्या जांच निष्पक्ष तरीके से जिम्मेदारों तक पहुंचेगी या यह मामला राजनीतिक बयानबाजी के शोर में दब जाएगा? परिवार ने अपना रुख साफ कर दिया है—दर्द पर राजनीति नहीं, दोषियों पर कार्रवाई और परिवार को न्याय चाहिए।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
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