रीवा के अस्पतालों पर अब ‘सरकारी पहरा’! कलेक्टर का बड़ा फैसला हर दिन अलग अफसर करेंगे औचक निगरानी
रीवा : SGMH, सुपर स्पेशलिटी, मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर प्रशासन की सीधी नजर | सोमवार से शनिवार तक अधिकारियों की ड्यूटी तय, कमी मिली तो कार्रवाई का प्रस्ताव
अस्पताल प्रबंधन की मनमानी पर लगेगी लगाम? कलेक्टर के आदेश से बदल सकता है निगरानी का पूरा सिस्टम!
रीवा जिले की प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाओं में व्यवस्थाओं को लेकर अब जिला प्रशासन ने सीधे मोर्चा संभाल लिया है। श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय,शासकीय संजय गांधी अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने नई व्यवस्था लागू कर दी है।
3 सितंबर 2026 को जारी आदेश के बाद अब अस्पतालों की निगरानी किसी एक अधिकारी के भरोसे नहीं रहेगी। सोमवार से शनिवार तक हर दिन अलग-अलग वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे और कमियां मिलने पर कार्रवाई का प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे।
सोमवार से शनिवार तक तय हुई अफसरों की ‘ड्यूटी’
कलेक्टर के आदेश के अनुसार अस्पतालों की निगरानी के लिए सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है—
- सोमवार — एसडीएम हुजूर अनुराग तिवारी
- मंगलवार — डिप्टी कलेक्टर जीतेन्द्र तिवारी
- बुधवार — अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी
- गुरुवार — जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख गौड़ा
- शुक्रवार — नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन
- शनिवार — संयुक्त कलेक्टर सुधीर कुमार बैक
यानी अब अस्पतालों में प्रशासनिक निगाह सप्ताह के लगभग हर कार्य दिवस बनी रहेगी।
कमियां मिलीं तो सिर्फ रिपोर्ट नहीं, कार्रवाई का प्रस्ताव भी
कलेक्टर के आदेश का सबसे अहम पहलू यह है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगा। संबंधित अधिकारी निरीक्षण के दौरान मिलने वाली त्रुटियों और कमियों को दर्ज करेंगे तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे।
इससे अस्पतालों में साफ-सफाई, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, व्यवस्थाओं की स्थिति और प्रशासनिक स्तर पर सामने आने वाली अन्य कमियों को लेकर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया मजबूत होने की उम्मीद है।
‘कागजी निगरानी’ नहीं, रोजाना मौके पर पहुंचेंगे अधिकारी
अस्पतालों में व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर उठने वाले सवालों के बीच जिला प्रशासन का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब व्यवस्था यह होगी कि अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारी खुद अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोजाना होने वाली यह प्रशासनिक निगरानी अस्पतालों की जमीनी व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला पाएगी?
अगर निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है, तो यह व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
कलेक्टर का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एवं आयुक्त,रीवा संभागीय आयुक्त,मेडिकल कॉलेज के डीन/अधीक्षक,सीएमएचओ और संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह नई ‘छह दिन की निगरानी व्यवस्था’ अस्पतालों की फाइलों से निकलकर वास्तव में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं तक कितना असर डालती है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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