जच्चा-बच्चा मौत मामले पर सियासी संग्राम,डिप्टी CM के आवास घेराव पर बवाल,पुलिस ने बरसाया पानी,छोड़े आंसू गैस के गोले

रीवा : संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला अब अस्पताल की दीवारों से निकलकर सीधे सियासी रणभूमि में पहुंच गया है। मंगलवार को मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के आवास का घेराव करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर टकराव हुआ।

मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष यश घनघोरिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता डिप्टी सीएम के आवास की ओर कूच कर रहे थे। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने आवास से पहले ही भारी बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया था। लेकिन कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने पर अड़ गए।स्थिति उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की रोक के बावजूद आगे बढ़ने का प्रयास किया। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर भगदड़ और अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर युवा कांग्रेस का सीधा हमला
युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि संजय गांधी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित बदहाली को उजागर कर दिया है। नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर अस्पताल में ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।
प्रदर्शनकारियों ने मामले में निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर मामले को लेकर गंभीरता से कार्रवाई करने का दबाव बनाया।
बैरिकेडिंग बनी टकराव का केंद्र
डिप्टी सीएम के आवास की सुरक्षा को लेकर पुलिस पहले से अलर्ट थी। जैसे ही प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के नजदीक पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई और आगे बढ़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए वाटर कैनन और आंसू गैस का सहारा लिया।
रीवा से भोपाल तक पहुंचा जच्चा-बच्चा मौत का मुद्दा
संजय गांधी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद पहले से ही प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। अब युवा कांग्रेस के उग्र प्रदर्शन ने इस मामले को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
जच्चा-बच्चा की मौत का मुद्दा अब सिर्फ अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है। डिप्टी सीएम के आवास तक पहुंचने से रोकने के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई ने इस विवाद को और हवा दे दी है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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